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Mumbai Saga Movie Review: भाईगिरी और एनकाउंटरगिरी की मसालेबाजी है मुंबई सागा

Mumbai Saga Movie Review: इस फिल्म के साथ भी ऐसा है। बीती सदी के आखिरी बरसों में मुंबई में एक डॉन नुमा शख्स हुआ डीके राव, जो अभी जिंदा है और जेल में है। और इस शख्स का पुलिस एनकाउंटर..

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Mumbai Saga, Movie Review, Rating: ज्यादा बड़ा अपराधी कौन है – लोगों पर गोली चलाने वाला गैंगस्टर, या अपने फायदे के लिए दूसरों पर गोली चलवाने वाला नेता या पैसे लेकर अपराधी को ठोकने का धंधा करने वाला पुलिसवाला? संजय गुप्ता की नई और ताजा फिल्म `मुंबई सागा’ ऐसे ही सवाल मन में पैदा करती है। निर्देशक संजय गुप्ता मुंबई की भाईगिरी और इनकाउंटर गिरी पर फिल्म बनाने के लिए मशहूर रहे हैं और उनकी ज्यादातर फिल्में किसी न किसी वास्तविक घटना या शख्स से प्रेरित होती है।

इस फिल्म के साथ भी ऐसा है। बीती सदी के आखिरी बरसों में मुंबई में एक डॉन नुमा शख्स हुआ डीके राव, जो अभी जिंदा है और जेल में है। और इस शख्स का पुलिस एनकाउंटर भी हुआ और किस्मत देखिए कि वो इसमे बच गया। जॉन अब्राहम ने मोटा मोटी उसी शख्स का किरदार निभाया है जिसका फिल्म में नाम अमर्त्य राव है। संजय मांजरेकर ने नेता भाऊ की भूमिका निभाई है जो अपराधियों का अपनी ताकत और सत्ता के लिए इस्तेमाल करता है। इमरान हाशमी ने विजय नाम के उस पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है जो पैसे लेकर अपराधियों का एनकाउंटर करता है।

फिल्म में जॉन अब्राहम की एक्टिंग लाजबाब है और इमरान हाशमी के साथ उनका जोरदार मुकाबला है। जहां तक मसालेबाजी का सवाल है फिल्म दमदार है। लेकिन कहानी थोड़ी लंबी और मध्यांतर के बाद इधर-उधर भटकने लगती है। जब तक गोलियां चलती हैं और विरोधियों का खात्मा किया जाता है तब तक दर्शक सांस रोक कर फिल्म देखता रहता है लेकिन जब कोई जज्बाती मामला आता है थोड़ा ढ़ीलापन आने लगता है।

वैसे तो ये फिल्म मुंबई के उस दौर की याद दिलाती है जब वो बंबई के नाम से जानी जाती थी और अपराधियों के कई गैंग उभर रहे थे। वे आपस में भी लड़ रहे थे और पुलिस भी कानून-व्यवस्था की आड़ में उनको खलास कर रही थी। दाउद इब्राहिम और छोटा राजन जैसे `भाई’ समानातर सत्ता के रूप में सामने आए थे और इस दौरान वहां के बड़े उद्योगपति अपने लाभ के लिए अपराधियों और नेताओं से साठगांठ कर रहे थे।

हालांकि हालात अब भी बहुत ज्यादा नहीं बदले हैं। बहरहाल, फिल्म में चुस्त डाय़लागबाजी है। काजल अग्रवाल और अंजना सुखानी को करने के लिए कुछ खास नहीं है सिवाय घरवालियों की भूमिका निभाऩे के। वैसे अपराध पर बनी ज्यादातर फिल्मों में हीरोइनें इसलिए होती हैं कि पता चल सके अपराधी से लेकर पूंजीपति तक शादीशुदा होतें है। आखिर उनके जाने पर कोई रोनेवाली तो चाहिए।

मुंबई सागा (2 ½ *)
निर्देशक- संजय गुप्ता
कलाकार – जॉन अब्राहम, इमरान हाशमी, काजल अग्रवाल, अंजना सुखानी, प्रतीक बब्बर, सुनील शेट्टी, संजय मांजरकर

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