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Mitron Review: एक कामचोर लड़का और एक महत्वाकांक्षी लड़की, हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देगी ‘मित्रों’

Mitron Movie Review, Rating: 2012 में फिल्म फिल्मिस्तान के साथ अपने करियर की शुरूआत करने वाले नितिन कक्कड़ अपनी दूसरी फिल्म 'मित्रों' के साथ हाजिर है और फिल्म अपने सधे हुए ह्यूमर से दर्शकों का मनोरंजन करने में सफल रही है।

Mitron Movie Review:

Mitron Movie Review, Rating: पिछले कुछ समय में बॉलीवुड में निर्देशकों की नई खेप, मनोरंजक और प्रयोगधर्मी फिल्मों से अपना एक वर्ग स्थापित करने की कोशिश में है। ऐसे में सिनेमा में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी ये काफी एक्साइटिंग समय है। लव रंजन जैसे नए निर्देशक की फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ 100 करोड़ का कारोबार कर चुकी है, वहीं अमर कौशिक के निर्देशन में बनी ‘स्त्री’ भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है। इसी कड़ी में नितिन कक्कड़ का भी नाम लिया जा सकता है। नितिन की 2012 में आई पहली फिल्म ‘फिल्मिस्तान’ को क्रिटिक्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।  फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म के नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया और अब वे अपनी कॉमेडी फिल्म ‘मित्रों’ के साथ ही दर्शकों को एक अच्छी एंटरटेनर फिल्म देने में सफल रहे हैं।

फिल्म में जैकी भगनानी और कृतिका कामरा लीड भूमिका में है। जैकी भगनानी (जय) डिग्री से भले ऑटोमोबाइल इंजीनियर हो लेकिन वो पेशे से बेरोज़गार ही है। नौकरी में भी उसकी खास दिलचस्पी नहीं है इसलिए वो एक अमीर लड़की को शादी के लिए देखने जा पहुंचता है ताकि दहेज के पैसे से ज़िंदगी थोड़ी आराम से कट सके। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बातों बातों में पता चलता है कि जय का परिवार रिश्ते के लिए गलत एड्रेस पर आ पहुंचे हैं। वही फिल्म की लीड एक्ट्रेस कृतिका कामरा यानि अवनी एमबीए है, महत्वाकांक्षी है, बिज़नेस करना चाहती है लेकिन अवनी के पिता जल्द उसकी शादी कराना चाहते हैं और इसलिए इमोश्नल ब्लैकमेल करते हुए उसे शादी के लिए लड़कों से मिलवा रहे हैं। जय और अवनी की मुलाकात के बाद दोनों की ज़िंदगी में कुछ नाटकीय बदलाव आते हैं और फिल्म क्लाइमैक्स तक दर्शकों को बांधने में कामयाब रहती है।

जैकी भगनानी ने इस फिल्म में अपनी पिछली फिल्मों से बेहतर प्रदर्शन किया है और अपने किरदार को संवेदनशीलता के साथ निभाने में कामयाब रहे हैं। कृतिका कामरा टीवी पर कई शोज़ पर काम कर चुकी हैं लेकिन उनको बड़े पर्दे पर देखकर लगता नहीं है कि ये उनकी पहली फिल्म है। जय के दोस्त के तौर पर प्रतीक गांधी का काम शानदार है। बाकी एक्टर्स भी अपने किरदारों के साथ न्याय करने में सफल रहे हैं। एक्टर शारिब हाशमी ने इस फिल्म की स्टोरी लिखी है जो एक तेलुगू फिल्म से प्रेरित है। फिल्म का स्क्रीनप्ले टाइट है हालांकि फिल्म के दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी सी लंबी खिंचती हुई नज़र आती है पर फिल्म का क्लाइमैक्स शानदार है।

फिल्म का म्यूज़िक फिल्म की रफ्तार में बाधा नहीं बनता। फिल्म का गाना कमरिया पहले ही काफी लोकप्रिय हो चुका है वहीं फिल्म में सोनू निगम का गाया गाना भी सुनने लायक है। कॉमेडी फिल्मों को पसंद करने वाले लोग इस फिल्म को देख सकते हैं। फिल्म स्त्री की तरह ही मित्रों को भी माउथ पब्लिसिटी का फायदा मिल सकता है। साफ सुथरी और बेहतरीन कॉमेडी फिल्म होने के चलते इस फिल्म को पूरी फैमिली के साथ इंजॉय किया जा सकता है।

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