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Mission Mangal Movie Review and Rating: भारतीयों का गर्व से सिर ऊंचा करती है ‘मिशन मंगल’

Mission Mangal Movie Review and Rating: एक महिला केंद्रित वैज्ञानिक कथा भी है। यानी घरेलू महिलाओ भी सहज रूप से वैज्ञानिक हो सकती हैं। ये जितनी अक्षय कुमार की है उतनी ही विद्या बालन की भी।

फिल्म मिशन मंगल का एक सीन।

Mission Mangal Movie Review and Rating:  बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी ऐसी कई फिल्में बनी हैं जिनमें मूल विचार ये होता कि अगर कोई शिद्दत से सपना देखे और उसे हकीकत बनाने पर तुल जाए तो सफलता मिलती है। `मिशन मंगल’ भी ऐसी ही फिल्म है। हालांकि इसका मूल विचार 2014 में भारत के इसरो (इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) की तरफ पर मंगल ग्रह की कक्षा में भेजे गए उपग्रह वाले वाकये से लिया गया है। पर जैसा कि फिल्मों में होता है, इस फिल्म में भी काल्पनिक आजादी ली गई है। एक महिला केंद्रित वैज्ञानिक कथा भी है। यानी घरेलू महिलाओ भी सहज रूप से वैज्ञानिक हो सकती हैं। ये जितनी अक्षय कुमार की है उतनी ही विद्या बालन की भी।

फिल्म एक असफलता से शुरू होती है। इसरों की तऱफ से जीएसएलवी सी-39 नाम का एक रॉकेट अंतरिक्ष में भेजने का अभियान असफल होता है। इसके बाद इस अभियान से प्रमुख वैज्ञानिक राकेश धवन (अक्षय कुमार) और सहयोगी तारा शिंदे (विद्या बालन) को ऐसे प्रोजेक्ट में भेज दिया जाता है जो सिर्फ कागजी है और मंगल ग्रह से संबंधित है। अब दोनों क्या करें? फिर एक दिन घर में रसोई गैस खत्म होने की आशंका के बीच तारा को एक विचार आता है जिसके तहत मंगल की कक्षा (ऑर्बिट) में उपग्रह सफलता के साथ भेजा जा सकता है। विचार सुनकर राकेश तो तैयार हो जाता है पर इसरो के भीतर पूरा सहयोग नही मिलता। जो वैज्ञानिक उनके साथ काम करने भेजे जाते हैं उनमें उत्साह और ऊर्जा दोनों की कमी है। फिर भी दोनों धुन के पक्के हैं और लग जाते हैं। और जो धुन में पक्के होते हैं उनको तो सफलता मिलती ही है।

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फिल्म कई स्तरों पर दिल को छूती है। विज्ञान से संबंधित विषय को लेकर फिल्म को रोचक बनाने रखता काफी मुश्किल चीज है। निर्देशक की सबसे बड़ी खूबी है कि इस मुश्किल चीज को पटकथा के स्तर पर बेहद आसान बना दिया है। फिल्म ये बताती है कि विज्ञान कोई दूर की कौड़ी नहीं है और दैनिक जीवन के अनुभवों को विज्ञान से जोड़ा जा सकता है। इसीलिए तो तारा शिंदे के मन में अपनी कामवाली से पूरी बनवाते समय ही ये आइडिया क्लिक करता है कि कम ईंधन के इस्तेमाल से भी अंतरिक्ष में उपग्रह आसानी से लंबे समय के लिए भेजा जा सकता है।

फिल्म हंसी मजाक भरपूर है। विद्या बालन के साथ साथ –तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी, नित्या मेनन और शर्मन जोशी द्वारा निभाए गए चरित्रों की रोजाना की परेशानियों को इस मिशन जरूरतों से जोड़ने का काम करती हैं। फिल्म में कई ऐसे वाकये होते हैं जिनमें हंसी ही हंसी है। जैसे शरमन जोशी ने परमेश्वर नायडू नाम के जिस चरित्र को निभाया है वो अंधविश्वासी है। उसकी शादी नहीं हो रही है और उसे एक ज्योतिषी ने भरोसा दिला दिया है कि उसकी कुंडली में मंगल का प्रकोप है। जब उसे मंगल ग्रह के प्रोजेक्ट में इसरो की तरफ से भेजा गया है तो उसे लगता है कि वो तो गया अब काम से। मंगल से बचने चले और मंगल मे ही फंस गए। वो राकेश और तारा को भी सलाह देता है कि अपनी कुंडली दिखवा लें। इस तरह की कई घटनाएं फिल्म में है जो माहौल को हल्का बनाए रखती हैं।

Mission Mangal Full Movie Leaked Online: 

फिल्म के निर्देशक जगन शक्ति हैं और इसकी सफलता का श्रेय उनको ही मिलेगा। आखिर ये फिल्म बनाने का सपना तो उनका ही था। पर ये भी नहीं भूला जाना चाहिए ज्यादातर सफलताएं सामूहिक प्रयासों की वजह से मिलती हैं। फिल्म `मिशन मंगल’ भी यही बताती है। इसलिए इस फिल्म के क्रिएटिव निर्देशक आर बाल्की को भी इस फिल्म की सफलता का श्रेय मिलेगा। बाल्की कई बार ये साबित कर चुके हैं कि नए विचारों को फिल्म पर्दे पर किस तरह दक्षता के साथ पेश करें।

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