Movie Review 'मेरठिया गैंगस्टर्स': गैंगगीरी में लुकाछिपी का खेल - Jansatta
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Movie Review ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’: गैंगगीरी में लुकाछिपी का खेल

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का चरित्र ‘डिफनिट’ जिसे जीशान कादरी ने निभाया था, अब वे निर्देशक बन गए हैं और ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ उनकी पहली फिल्म है..

फिल्म प्रेमियों को अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का चरित्र ‘डिफनिट’ तो याद होगा। यह चरित्र जीशान कादरी ने निभाया था। अब वे निर्देशक बन गए हैं और ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ उनकी पहली फिल्म है। बेशक इस फिल्म पर अनुराग कश्यप की छाप है और वे इसके एक एडिटर भी हैं। लेकिन ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ एक मायने में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से अलग भी है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में जो गैंगस्टर थे वे बदला लेने की भावना से इस दुनिया में आए थे और ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ में गैंगगीरी पेशा बन गया है। यानी लोगों को अगवा करो तो पैसा मिलेगा। अपराध एक व्यवसाय बन गया है।

छह दोस्त हैं- निखिल (जयदीप अहलावत), अमित (आकाश दहिया), गगन (वंश भारद्वाज), राहुल (चंद्रचूड़ राय) सनी (शादाब कमाल), संजय (जतिन)। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद ये सब तय करते हैं कि अपना धंधा शुरू किया जाए। धंधा है फिरौतीगीरी। यानी पैसे के लिए लोगों को अगवा करना और फिरौती वसूल करना। पहली कोशिश में वे सफल भी होते हैं और पैसा भी बना लेते हैं। लेकिन जब वे एक कंपनी के अधिकारी को अगवा करके पैसा बनाना चाहते हैं तो फंस जाते हैं। और फिर शुरू होता है लुकाछिपी का खेल। पुलिस अधिकारी (मुकुल देव) अपराधियों को ढूंढ़ना शुरू कर देता है।

फिल्म में पटकथा पर काम नहीं किया गया है और इस वजह से बिखराव बहुत है। हंसी-मजाक फिल्म में है। इस कारण कुछ दृश्यों पर दर्शकों की निगाह टिकती भी है पर कुल मिलाकर ढीली फिल्म है। क्रिकेटर सुरेश रैना ने इसमें एक गाना गाया है। लेकिन वह इस फिल्म को उठा देगा ऐसा नहीं है। फिल्म ‘ट्वेंटी ट्वेंटी’ क्रिकेट नहीं है कि रैना आएं और चौके-छक्के मार कर नैया पार लगा दें। निर्देशकीय कल्पनाहीनता साफ-साफ दिखती है।

(कलाकार-जयदीप अहलावत, आकाश त्यागी, वंश भारद्वाज, चंद्रचूड़ राय, शादाब कमाल, जतिन सरना, संजय मिश्रा, मुकुल देव)

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