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Karwaan Movie Review: दौ़ड़ती भागती ज़िंदगी में सुकून के कुछ पलों को तलाशती है कारवां

Karwaan Movie Review and Rating: इस फिल्म के कई हिस्सों में ड्रामा और डार्क ह्यूमर देखने को मिलेगा। कई सीन्स में ये ह्यूमर जंचता है लेकिन कई सीन्स में ये अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाता।

कैंसर से जूझते इरफान के लिए कारवां फिल्म की स्पेशन स्क्रीनिंग लंदन में रखी गई थी।

Karwaan Movie Review and Rating: दुलकर (अविनाश) एक बैचेनी से भरा इंसान है जो अपनी असफलता के लिए अपने पिता को दोषी ठहराता है। अविनाश का अपने पिता के साथ जटिल किस्म का रिश्ता है। वो अपने ड्रीम्स पूरे न हो पाने के लिए अपने पिता को जिम्मेवार मानता  है लेकिन पिता की अचानक मौत के बाद वो बेंगलुरू से कोच्चि आ जाता है। इस सफर में उसके साथ उसका दोस्त शौकत(इरफान) भी होता है और इसी यात्रा के दौरान दोनों को भागती दौड़ती ज़िंदगी में कुछ पल अपने जीवन पर विचार करने को मिल जाते हैं। इन दोनों की मुलाकात तान्या से होती है और फिल्म नया मोड़ लेती है। साउथ इंडिया की खूबसूरत लोकेशंस पर शूट हुई ये फिल्म तीन लोगों की त्रासदी भरी ज़िंदगी को पटरी पर लाने की कहानी है।

इस फिल्म के कई हिस्सों में ड्रामा और डार्क ह्यूमर देखने को मिलेगा। कई सीन्स में ये ह्यूमर जंचता है लेकिन कई सीन्स में ये अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाता। फिल्म की पटकथा यूं तो कसी हुई है और फिल्म को कई स्तर पर रियलिस्टक दिखाने की कोशिश की गई है लेकिन कुछ सीन ऐसे भी हैं जब परिस्थितियां थो़ड़ी अकल्पनीय लगती हैं।

मलयालम फिल्मों के सुपरस्टार दलकीर ने कारवां के साथ ही हिंदी फिल्मों में अपना शानदार डेब्यू किया है। दलकीर स्क्रीन पर बेहद नेचुरल दिखते हैं, उनकी हिंदी में भी कोई कमी नहीं नज़र आती और अपनी पहली फिल्म से ही वे साबित करते हैं कि वे बॉलीवुड में लंबी रेस के घोड़े होने जा रहे हैं। वहीं लिटिल थिंग्स जैसी वेब सीरीज़ से सुर्खियों में रह चुकी मिथिला भी इस फिल्म में बेहद स्वाभाविक दिखती हैं, हालांकि उनके रोल की रेंज उतनी नहीं है। फिल्म में स्पेशल रोल के तौर पर नज़र आई कृति खरबंदा भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहती है। इरफान के किरदार में लेयर्स की कमी है लेकिन इरफान इतने बेहतरीन एक्टर हैं कि कैरेक्टर में कमी होने के बावजूद वे इस किरदार को अपनी क्षमताओं से उबार देते हैं। छोटे छोटे लम्हों पर फोकस करती कारवां की कहानी में बहुत नाटकीय बदलाव देखने को नहीं मिलते हैं लेकिन फिल्म आपको एक अच्छे एहसास के साथ थियेटर से बाहर छोड़ जाती है।

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