ताज़ा खबर
 

Kapoor & Sons movie Review: हर उम्र के लोगों के एंटरटेनमेंट का शानदार ‘पैकेज’

`लड़की ब्यटीफूल, कर गई चुल' इस फिल्म के सबसे लोकप्रिय गाने के बोल हैं और ये अलग से कहने की जरूरत नहीं कि ये फिल्म भी चुल कर जाती है। अब `चुल’ का शाब्दिक अर्थ जो भी हो लेकिन फिल्म दिल को छूने वाली है।

वेटरन एक्‍टर रिषी कपूर ने दादा का रोल किया है।

`लड़की ब्यटीफूल, कर गई चुल’ इस फिल्म के सबसे लोकप्रिय गाने के बोल हैं और ये अलग से कहने की जरूरत नहीं कि ये फिल्म भी चुल कर जाती है। अब `चुल’ का शाब्दिक अर्थ जो भी हो लेकिन फिल्म दिल को छूने वाली है। हालांकि युवा वर्ग की मानसिकता को इसमें सबसे ज्यादा दिखाया गया है। साथ ही ऋषि कपूर ने नब्बे साल के जिस सदाबहार और सनकी दादाजी का किरदार निभाया है, उससे ये हर उम्र के लोगों को आकर्षित करेगा। ये एक ऐसा पारिवारिक ड्रामा है जिसमें परिवार नाम की चीज तितरबितर हो गई है।

वैसे इस फिल्म में ‘एक फूल दो माली’ तत्व भी है। आप कह सकते हैं कि एक हसीना और दो दीवाने। फूल यानी हसीना है आलिया भट्ट और माली या दीवाने हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और फवाद खान। फवाद ने बड़े भाई राहुल कपूर नाम के शख्स का किरदार निभाया है और सिद्धार्थ ने अर्जुन कपूर नाम के शख्स का। दोनो भाई हैं पर स्वभाव अलग अलग है। बड़ा भाई संजीदा है और अपने आसपास की घटनाओं को गंभीरता से लेता है। छोटा भाई मस्त है। बड़ा भाई इंग्लैंड से अपने दादा (ऋषि कपूर) की बीमारी की खबर पाकर घर कुन्नुर (तमिलनाडु) यानी भारत आता है। यहां आकर उसे पता लगता है कि उसके पिता और माता (रजत कपूर और रत्ना पाठक शाह) के बीच नहीं बनती। दादाजी अपने जीवन की आखिरी चरण में हैं लेकिन उनकी रंगीनमिजाजी गई नहीं है। दरअसल वे जिंदगी को, जितनी बची हुई है उसे, पूरी तरह जीना चाहते हैं।

स्थितियां कुछ ऐसी बनती है कि अनजाने में ही दोनों भाई टिया नाम की एक ही लड़की से प्यार करने लगते है। वो लड़की किसकी होगी, इसी उत्सुकता पर फिल्म आगे बढ़ती रहती है। साथ ही होते हैं परिवार में तनाव और झगड़े। मान मनौवल भी। परिवार में तीन पीढियां हैं और तीनों अपने अपने मिजाज में अलग हैं। एक तरह से ये एक बेतरतीब परिवार हैं पर इस बेतरतीबी में भी इश्व-विश्क भी होता रहता है। कई तरह के जज्बात इस फिल्म में हैं इसलिए दर्शक को कभी एकरसता नहीं होती। हंसी के फव्वारे कई जगहों पर हैं।

जहां तक अभिनय का सवाल है तो फिल्म में आलिया भट्ट की कमाल की एनर्जी देखने को मिली है। आलिया एक ऐसी लड़की हैं, जो अपने बारे में खुद फैसले करने में समर्थ है। सिद्धार्थ और फवाद भी अपनी अपनी भूमिकाओं में जमते हैं पर जो शख्स अदाकारी की सीमाओं को लाघंता है वो हैं ऋषि कपूर। वैसे उनके मेकअप पर खास ध्यान दिया गया है और इसके लिए विदेशी मेकअपमैन को बुलाया गया है। मेकअप छह घंटे के करीब का समय लगता था। इस मेकअप के कारण वे सच में नब्बे साल के लगते हैं। और उनके संवाद और अंदाज तो चुटीले हैं ही। रत्ना और रजत भी अपनी भूमिकाओं में प्रभावशाली हैं लेकिन ऋषि कपूर तो महफिल लूट ले जाते हैं। उसी तरह जैसा कि उन्होंने `अग्निपथ’ में किया था। फिल्म के दूसरे गाने भी मधुर हैं और लोगों की जुबान पर चढ़ने वाले हैं।

फिल्म के निर्देशक शकुन बत्रा अभिनेता और लेखक भी हैं। वे वूडी एलन से प्रभावित फिल्मकार हैं। इस फिल्म की कहानी के वे आयशा देविते के साथ सहलेखक भी हैं। इसके पहले वे एक फिल्म का निर्देशन भी कर चुके हैं- `एक मैं और एक तू’ का। पर वो खास चली नहीं। पर `कपूर और संस’ की गिनती एक अच्छे फिल्म के रूप में होगी। निर्माता करण जौहर ने उन पर भरोसा किया है, उसमें खरे उतरेंगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App