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जग्गा जासूस मूवी रिव्यूः परीकथा शैली में धीमी गति की जासूसी

अनुराग बसु यह तय नहीं कर पाए कि वे एक परीकथा बना रहे हैं या जासूसी की कहानी। नतीजा यह हुआ कि फिल्म दोनों के बीच झूलती हुई है।

कलाकार-रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ, सौरभ शुक्ला, शाश्वत चटर्जी

अनुराग बसु यह तय नहीं कर पाए कि वे एक परीकथा बना रहे हैं या जासूसी की कहानी। नतीजा यह हुआ कि फिल्म दोनों के बीच झूलती हुई है। हां, बसु में एक खास तरह का ‘सेंस आॅफ ह्यूमर’ है और इस फिल्म के संवाद भी संगीतात्मक हैं इसलिए ये बीच-बीच में बच्चों का मनोरंजन भी करती है। लेकिन बड़ों का नहीं। कम से कम भरपूर नहीं। ‘जग्गा जासूस’ एक ऐसी फिल्म है जो गुदगुदी तो पैदा करती है मगर जोर से हंसाती नहीं है। और जासूसी विधा की होने के बावजूद कहीं भी किसी तरह का रोमांच नहीं पैदा करती।

‘जग्गा जासूस’ के बनने और रिलीज होने में लंबा वक्त लगा। फिल्म में कई साल पहले पुरुलिया में हथियार गिराए जाने वाले वाकये को आधार बनाया गया है। लेकिन ये समझना भूल होगी कि ये पुरुलिया हथियार कांड की तफ्तीश करता है। वह कांड एक बहाना भर है और उस पूरे वाकये को आधार बनाकार एक म्यूजिकल कॉमेडी बनाई गई है। इसमें जग्गा (रणबीर कपूर) अपने उस पिता तुल्य व्यक्ति टूटीफ्रूटी या बादल बागची (शाश्वत चटर्जी) की खोज में निकलता है। जग्गा बचपन में हकलानेवाला शख्स था और इसीलिए बोलने से हिचकता था।

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टूटीफ्रूटी ने जग्गा को सिखाया कि अगर वह अपनी बात गाकर कहेगा तो हकलाएगा नहीं। बस जग्गा गाने की अदा में संवाद बोलने लगा। फिर जब टूटीफ्रूटी एक दिन गायब हो गया तो जग्गा उसकी खोज में निकलता है और अफ्रीका तक जा पहुंचता है। इसका व्यावहारिक मतलब ये है कि आप इस फिल्म में कई अफ्रीकी जीवजंतु भी देखते हंै। जग्गा की इस खोजी यात्रा में एक पत्रकार श्रुति (कैटरीना कैफ) भी उसके साथ है। क्या जग्गा पिता तुल्य टूटीफ्रूटी को खोज पाएगा और इस बहाने पुरुलिया हथियार कांड के वास्तविक अपराधियों तक पहुंच पाएगा? और ये सब वो गाना गाते हुए कर पाएगा?
रणबीर कपूर क्या हकलाने को अपनी स्थायी अदा बना के ही रहेंगे? इसके पहले भी वे ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ में कैटरीना कैफ के साथ हकलाने का खेल खेल चुके हैं। पर वो कहते हैं न कि काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती। वैसे की हकलाता हीरो बार बार हिट नहीं होता। फिल्म अनावश्यक रूप से लंबी है और कम से कम चालीस मिनट कम होनी चाहिए। अनुराग बसु ने रनबीर को लेकर ‘बरफी’ फिल्म बनाई थी। ‘जग्गा जासूस’ के कुछ दृश्य ‘बरफी’ की याद दिलाने वाले भी हैं।
खासकर सौरभ शुक्ला और रणबीर कपूर के बीच लुकाछिपी के कुछ खेल ‘बरफी’ के लुकाछिपी वाले कुछ दृश्यों से मिलते जुलते हैं। चूंकि ‘जग्गा जासूस’ संगीतात्मक है और गानों के अलावा संवाद भी गा-गाकर बोले गए हैं इसलिए ये कभी बोर करती। इसके कुछ गाने लोकप्रिय हो गए हैं। जैसे ‘खाना खाके दारू पीके चले गए…’
अनुराग बसु शायद दोनों ही हाथों में लड्डू चाहते थे। वे एक थ्रिलर भी चाहते थे और परीकथा शैली में म्यूजिकल भी। लेकिन दोनों के बीच संतुलन कायम नहीं कर पाए। फिर भी इस फिल्म को बच्चे पसंद कर सकते हैं। जग्गा बच्चों के कॉमिक्स बुक्स का एक चरित्र लगता है। श्रुति जग्गा के बारे में बच्चों को किस्सा सुनाती है। इस तरह जग्गा कॉमिक बुक्स का भी एक चरित्र है।

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