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Movie Review: कॉमेडी से भरपूर है ‘गुड्डु की गन’

हॉलीवुड की फिल्म बैड जॉनसन एंड स्विच' से आइडिया लेकर बनी ये फिल्म भारतीय सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट कैसे पा गई, ये शोध का विषय है।

निर्देशक-शांतनु राय छिब्बर, शीर्षक आनंद
कलाकार- कुणाल खेमू, पायल सरकार, सुमित व्यास
हॉलीवुड की फिल्म से आइडिया लेकर बनी ये फिल्म भारतीय सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट कैसे पा गई, ये शोध का विषय है। ये एक सेक्स कॉमेडी और उस लिहाज से कुछ कुछ मनोरंजक भी है। द्विअर्थी संवाद भी इसमें हैं। गन का मतलब भी द्विअर्थी है। ये गुड्डु (कुणाल खेमू) नाम के एक ऐसे युवा की कहानी है जिसका पेशा तो वाशिंग पाउडर बेचना है।

मगर इस पेशे की आड़ में वो घर घर जाकर शादीशुदा औरतों को पटाता है। और फिर इसी चक्कर में एक तांत्रिक उस पर काला जादू करके स्थिति ऐसी बना देता है कि गुड्डु को होश फाख्ते हो जाते हैं। मतलब ये कि उसके पौरूष का प्रतीक,यानी उसका लिंग, सोने के धातु में बदल जाता है।

अब गुड्डु क्या करे? क्या वो कभी सहज स्थिति में आ सकेगा? सहज स्थिति में आने के लिए उसे किसी लड़की का सच्चा प्यार चाहिए। क्या वो उसे मिल पाएगा? फिल्म इसी बात को लेकर आगे बढ़ती है और हास्य पैदा करने की कोशिश करती है।
कुणाल खेमू शायद आनेवाले बरसों में इस बात को लेकर पछताएं कि उन्होंने ऐसी फिल्म में काम किया है। वे हीरो बनने का सपना लेकर चले थे लेकिन इस फिल्म के बाद उनकी छवि एक मसखरे की बन सकती है। पर ये पसंद अपना अपना का मामला है। दर्शक को फिल्म पसंद नहीं आनेवाली है।

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