Dear Maya Review: मनीषा कोईराला ने जबरदस्त एक्टिंग से बिखेरा जादू, मदिहा इमाम और श्रेया चौधरी का शानदार डेब्यू - Dear Maya Movie Review and Film IMDB Ratings in Hindi: Manisha Koirala movie has a slo-mo story - Jansatta
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Dear Maya Review: मनीषा कोईराला ने जबरदस्त एक्टिंग से बिखेरा जादू, मदिहा इमाम और श्रेया चौधरी का शानदार डेब्यू

Dear Maya Review: एना को प्रोत्साहन तब मिलता है जब माया उनका जवाब देना शुरू करती है और अपनी लाइफस्टाइल से बाहर आने को कोशिश करती है। वो सूरज की रोशनी के लिए अपनी खिड़कियों और दरवाजं को खोलना शुरु कर देती है।

डियर माया मूवी कास्ट: मनीषा कोईराला, महीदा इमाम, श्रेया चौधरी

डियर माया मूवी डायरेक्टर: सुनैना भटनागर

डियर माया मूवी रेटिंग: 3.5

आप सभी को 2002 में आई विशाल भारद्वाज की सस्पेंस से भरी हुई फिल्म मकड़ी तो याद होगी। उसी तरह की समानताएं मनीषा कोईराला की फिल्म के फर्स्ट हाफ में आपको देखने को मिलेंगी। शिमला में रहने वाली कहानी की लीड माया (मनीषा कोईराला) खुद को पुरखों के घर में राजपूताना चीजों, दो पालतू कुत्तों और चिड़ियां के साथ बंद करके रखती है। इस वजह से पड़ोस में रहने वाली और स्कूल में पढ़ने वाली 16 सील की लड़कियों एना (मदीहा इमाम) और इरा (श्रेया चौधरी) का ध्यान उसपर जाता है। अतीत में हुई किसी घटना की वजह से माया ने कभी किसी आदमी के प्यार को महसूस नहीं किया होता है। इस बात का पता जब उसकी पड़ोसी को चलता है तो उसकी तो इरा एना को माया के अतीत से किसी अनाम आशिक के नाम पर लव लेटर लिखने के लिए मना लेती है।

पहले एना मना करती है। हालांकि बाद में मान जाती है और माया के लिए खूबसूरत लव लैटर लिखती है। उसे प्रोत्साहन तब मिलता है जब माया उनका जवाब देना शुरू करती है और अपनी लाइफस्टाइल से बाहर आने को कोशिश करती है। वो सूरज की रोशनी के लिए अपनी खिड़कियों और दरवाजं को खोलना शुरु कर देती है। हालांकि इसी बीच इरा एक गलती कर बैठती है और पत्र पर दिल्ली का पता लिख देती है। इसकी वजह से माया को अपना सबकुछ बेचकर जाना पड़ता है ताकि वो दिल्ली में अपने प्यार के साथ रह सके। इस बात से दुखी एना अपने पैरेंट्स को सबकुछ बता देती है। जिसके बाद वो उसे बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं और वो इरा से अपनी दोस्ती भी तोड़ देती है। 6 सालों बाद दोनों माया को ढूंढने के लिए एक हो जाते हैं। जो कि पता नहीं जिंदा है भी या नहीं।

केंद्र में फिल्म काफी ईमानदार नजर आती है। हालांकि बाद में कहानी बिखर जाती है। कहानी को एक फ्लो में बनाए रखने में निर्देशन की कमी नजर आती है। इसके अलावा कई ऐसे सवाल हैं जिनके आपको जवाब नहीं मिलते। जैसे- एना ने माया को ढूंढने में 6 साल की देरी क्यों की? पत्र भेजने से पहले उसने दिल्ली वाले पते को ध्यान से क्यों नहीं देखा? उसने लापता रिपोर्ट क्यों दर्ज की जबकि उसे पता था कि माया अपने अनदेखे प्यार को ढूंढने के लिए सबकुछ बेचकर चली गई है?

कहानी में कई ढील के बावजूद निर्देशक इसपर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करती है। मदीहा और श्रेया के पास के पास गजब की एनर्जी है। डियर माया दो लड़कियों की नादानी पर आधारित फिल्म है। इसके जरिए एक संदेश देने की कोशिश की गई है। इस तरह की कहानी बॉल्वुड में देखने को मिलती हैं कम।

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