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Chhapaak Movie Review, Rating: साहसी दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ से बदल देगी आपकी सोच

Chhapaak Movie Review, Rating, Release: अगर दीपिका ने ऐसी लड़की का किरदार निभाया है जिसका चेहरा एसिड से बुरी तरह झुलस गया है तो ये जोखिम भरा काम तो है। ये जान और समझ कर भी कि ऐसी फिल्म को देखने की उत्सुकता कम दर्शकों को हो सकती है। दीपिका की भूमिका और फिल्म दर्शकों का सोच बदलनेवाली है।

Chhapaak Movie Review : छपाक में दीपिका पादुकोण

Chhapaak Movie Review, Rating, Release: इसमें शक नहीं कि दीपिका पादुकोण में एक साहस है और उनके व्यक्तित्व का ये साहसी पहलू जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्र- छात्राओं का नैतिक साथ देने भर से नहीं दिखता। बल्कि ये उस तरह की फिल्म यानी `छपाक’ करने या उसमें मुख्य भूमिका निभाने से हैं जिसमें तेजाब या एसिड से चेहरा बिगड़ जाता है। व्यावसायिक फिल्म एक फीलगुड़ माध्यम है यानी उसमें सब सजा संवरा दिखाया जाता है। ये आम तौर पर माना जाता है कि फिल्म के दर्शक को चेहरे पर किसी तरह की कुरूपता पसंद नहीं। खासकर हीरोइन के चेहरे का।

ऐसे मे अगर दीपिका ने ऐसी लड़की का किरदार निभाया है जिसका चेहरा एसिड से बुरी तरह झुलस गया है तो ये जोखिम भरा काम तो है। ये जान और समझ कर भी कि ऐसी फिल्म को देखने की उत्सुकता कम दर्शकों को हो सकती है। दीपिका की भूमिका और फिल्म दर्शकों का सोच बदलनेवाली है।

`छपाक’ के बारे मे ये पहले ही आ चुका है कि ये फिल्म एक सच्चे वाकये पर आधारित है। लक्ष्मी अग्रवाल नाम की एक लड़की पर आठ साल पहले तेजाब फेंका गया था और उसके बाद उसने एक लंबा संघर्ष किया और कानूनी लड़ाई लड़ी कि तेजाब की खुली बिक्री बंद हो। ये कानूनी लड़ाई लंबी चली और कुछ हद तक इसमे सफलता भी मिली। लक्ष्मी एक सोशल एक्टिविस्ट बन गई। फिल्म उसी सोशल एक्टिविज्म यानी सामाजिक लड़ाई को सामने लाती है।

इसमे दीपिका का किरदार का नाम मालती है। मालती दो तरह का संघर्ष करती है। एक तो तेजाब की वजह से उसका चेहरा बिगड़ गया है और वो आईने में खुद को देखकर डरने लगती है। ऐसे में उसे खुद से लड़ना है। एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई जिसमें मन से हारना नहीं है।प्लास्टिक सर्जरी से वो अपने चेहरे को कुछ बदल पाती है। और उसे अदालत में लड़ना है। यहां भी दो स्तरों पर। एक तो खुद न्याय पाने के लिए और जिसने उसके ऊपर तेजाब फेंका है उसे सजा दिलाने के लिए और दूसरी लड़ाई लड़नी है जिसमें तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगे और साथ ही साथ दूसरी तेजाब पीडिता लड़कियों और महिलाओं के इंसाफ के लिए। दूसरी कानूनी लड़ाई भी वो लड़ती है और उसमें विजयी भी होती है।

फिल्म मे मालती और अमोल (विक्रांत मैसी) के बीच प्यार का रिश्ता भी दिखा है। एक अनकहा सा पर बाद मे कहा भी जाता है। अमोल एक एनजीओ चलाता है जो तेजाब पीड़ित महिलाओं के हक लिए बना है। इन पीड़िताओं के हक के लड़ते लड़ते वो धीरे धीरे खड़ूस भी बन जाता है। लेकिन मालती के सानिध्य में वो धीरे धीरे बदलता भी है।

फिल्म में एक दृश्य है जिसमें मालती और दूसरी तेजाब-पीड़िताएं हंस बोल रही हैं और पार्टी कर रही है। अमोल को ये बात खलती है क्योंकि इसे लगती है कि अभी को लंबी लड़ाई लड़नी है इसलए काहे की पार्टी और कोल्डड्रिक। अमोल के गुस्से पर मालती हंसते हुए कहती है- `एसिड मुझ पर फेंका गया है आप पर नहीं।‘ मतलब ये कि कोई लड़ाई लड़ते हुए हम हमेशा मुंह गिराएं ही रहें ये जरूरी नहीं, हंसते बोलते भी लड़ाई लड़ी जा सकती है।

मालती की वकील की भूमिका मधुरजीत सर्घी ने निभाई है। ये एक बहुत अहम रोल है और ये भी दिखाता है कि कोई लड़ाई अकेले नहीं जीती जाती होती और ऐसे वकील भी चाहिए तो बिना किसी आर्थिक लाभ के उन लोगों का मुकदमा लड़ सकें जो किसी न किसी तरह के अन्याय का शिकार हुए हैं। मेघना गुलजार की तीसरी – तलवार और राजी के बाद- ऐसी फिल्म है जो सामाजिक वास्तविकता से टकराती है। ये एक ,सोच बदलनेवाली फिल्म है।

कलाकार- दीपिका पादुकोण, विक्रात मैसी,  मधुरजीत सर्घी

छपाक (3*)
निर्दशन- मेघना गुलजार

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