'कलैंडर गर्ल्स' Movie Review: ग्लैमर की दुनिया का स्याह चेहरा - Jansatta
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‘कलैंडर गर्ल्स’ Movie Review: ग्लैमर की दुनिया का स्याह चेहरा

मधुर भंडारकर एक बार फिर से ग्लैमर की रंगीन दुनिया के पीछे का स्याह पक्ष लेकर आए हैं। पांच लड़कियां हैं- हैदराबाद की नंदिता मेनन (आकांक्षा पुरी), कोलकाता की पारोमिता घोष..

‘कलैंडर गर्ल्स’

निर्देशक: मधुर भंडारकर

कलाकार-आकांक्षा पुरी, अवनी मोदी, कीरा दत्ता, रूही सिंह, शतरूपा पाइन, सुहेल सेठ, रोनित रॉय

मधुर भंडारकर एक बार फिर से ग्लैमर की रंगीन दुनिया के पीछे का स्याह पक्ष लेकर आए हैं। पांच लड़कियां हैं- हैदराबाद की नंदिता मेनन (आकांक्षा पुरी), कोलकाता की पारोमिता घोष (शतरूपा पाइन), गोवा की शरोन पिंटो (कीरा दत्ता), रोहतक की मयूरी चौहान (रूही सिंह) और लाहौर की नाजनीन मलिक (अवनी मोदी)। बड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद ये पांचों कुमार (सुहेल सेठ) नाम के एक उद्योगपति के एक प्रोजेक्ट में शामिल होती हैं जो कलैंडर पर आनेवाली लड़कियों को लेकर है। आखिर इन्हें मंजिल मिल जाती है और कलैंडर को बड़े पैमाने पर लांच किया जाता है। लेकिन उसके बाद उनकी जिंदगी में आते हैं अनपेक्षित मोड़। पारोमिता को उसका पुराना बॉयफ्रेंड मिलता है जो उसका इस्तेमाल करता और एक मैच फिक्सिंग का हिस्सा बना देता है और पुलिस पारोमिता से पूछताछ शुरू कर देती है।

नाजनीन गायिका बनना चाहती है, लेकिन पाकिस्तानी मूल की होने की वजह से एक राजनीतिक खेल का शिकार बन जाती है और महिला एस्कॉर्ट बन जाती है। शरोन विज्ञापन की दुनिया में जाना चाहती है लेकिन वहां से प्रतिबंधित हो जाती है क्योंकि एक वाकये की वजह से वह विज्ञापन की दुनिया के बड़े शख्स को थप्पड़ मारती है। हालात ऐसे बनते हैं कि नंदिता एक धनी परिवार के लड़के से शादी करती है। बच जाती है मयूरी जो मेलजोल बढ़ाने की अपनी क्षमता की वजह से एक ऐसी फिल्म में रोल पा लेती है जो एक धन्ना सेठ के बेटे के फिल्मी कॅरियर के लिए बनाई जा रही है। क्या ये पांचों लड़कियां अपनी जिंदगी की आकांक्षाएं पूरी कर पाएंगी या बीच में ही उनके सपने टूट जाएंगे? फिल्म इसी बात को लेकर है।

‘फैशन’, ‘कॉरपोरेट’ और ‘पेज थ्री’ की तुलना में मधुर भंडारकर की इस फिल्म में जज्बाती पक्ष कमजोर है। मधुर ने इस फिल्म में खुद भी एक कैमियो की भूमिका निभाई है। शायद उनके भीतर भी हीरो बनने का ख्वाब जग रहा है। कुमार का चरित्र विजय माल्या के जीवन के करीब है। रोनित रॉय ने फोटोग्राफर की भूमिका निभाई है। फिल्म का सामाजिक पक्ष जरूर प्रामाणिक है लेकिन लोगों के दिल को यह छू सकेगी इसमें संदेह है।

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