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Babumoshai Bandookbaaz Movie Review: बंदूकों के बीच पनपते प्यार की कहानी दिखाती है नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म

Babumoshai Bandookbaaz Movie Review: एक कॉन्ट्रैक्ट किलर से लेकर लवर तक के किरदार में काफी जंच रहे हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी।

एक गैंगस्टर के तौर पर नजर आएंगे बाबू उर्फ नवाजुद्दीन सिद्दीकी।

अपनी एक्टिंग के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अलग पहचान बनाई है। 25 अगस्त को उनकी फिल्म रिलीज हो गई है जिसमें वो अपने गैंग्सटर अवतार में लौटे हैं। कहानी उत्तर प्रदेश के दो कॉन्ट्रैक्ट किलर बांके बिहारी (जतिन) और बाबू बिहारी (नवाजुद्दीन) की है। दोनों को लोगों की सुपारी मिलती रहती है। लेकिन ऐसी परिस्थितियां सामने आ जाती हैं जिसकी वजह से दोनों आपस में लड़ने लगते हैं। क्या बांके बाबू को जान से मार देगा या फिर बाबू खुद की जान बचा लेगा? यही फिल्म की कहानी है। दो लोगों की इस लड़ाई के बीच में एक प्रेम कहानी भी है। फुलवा (बिदिता बाग) की तरफ बाबू आकर्षित होता है और दोनों के बीच प्यार बढ़ता है।

बिदिता और नवाजुद्दीन के बीच फिल्म में किसिंग और इंटीमेट सींस फिल्माए गए हैं। इन सीन को देखकर नवाज की पत्नी असुरक्षित महसूस करने लगीं थीं। कुशान नंदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म आपको गैंग्स ऑफ वासेपुर की याद दिलाएगी। वजह है दोनों की पृष्ठभूमि काफी हद तक एक जैसी है। इसमें स्थानीय भाषा को शामिल किया गया है ताकि कहानी रीयल लगे। इसी वजह से फिल्म सेंसर बोर्ड के रडार पर आ गई थी। जिसने इसपर 48 कट लगाने का सुझाव था। ऐसा करने से डायरेक्टर ने साफ मना कर दिया और फिल्म को अपीलेट ऑथारिटी के पास ले गए और वहां से छोटे-मोटे कट के बाद फिल्म पास कर दी गई।

Babumoshai Bandookbaaz Trailer:

फिल्म में दिखाया गया है कि बाबू 10 साल की उम्र से लोगों को मार रहा है। सबसे पहले उसने भूखा होने की वजह से खून किया था। बांके बाबू का प्रशंसक है और उसकी तरह बनना चाहता है। इस सारे ड्रामा के बीच में सुचित्रा (दिव्या दत्ता) और दूबे (अनिल) राजनेता हैं जो इन बंदूकबाजों को अपने फायदे के लिए हायर करते हैं। वहीं फुलवा के पास जाने पर बाबू की जिंदगी रोशन हो जाती है।

फिल्म के स्क्रीनप्ले को और ज्यादा टाइट किया जा सकता था। लेकिन कुशान ने इस फिल्म को एक मस्ट वॉच बनाया है। गालिब असद भोपाली ने बंदूकबाजों के किरदार में जान डालने का काम किया है। नवाज का किलर से लेकर लवर तक का किरदार काफी प्रशंसनीय है। लेकिन फिल्म में कहीं कहीं पर बेवजह की कॉमेडी डालने की कोशिश की गई है जो आपको अटपटी लग सकती है।

https://www.youtube.com/watch?v=U5Gyw-nGf1I

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