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Movie Review

ग्रामीण समाज में दलितों के हालात बयान करती है ‘चौरंगा’

ये एक दलित विमर्श पर आधारित फिल्म है और इसकी पृष्ठभूमि बिहार के सुदूर इलाके की है। यह फिल्‍म ग्रामीण समाज में दलितों की...

Wazir movie review: अमिताभ और फरहान की एक्‍ट‍िंग फिल्‍म का सबसे सुनहरा पहलू

वजीर ऐसे दो चोट खाए लोगों की कहानी है, जो अलग अलग उम्र और मिजाज के हैं, लेकिन एक खास मकसद के लिए साथ...

फिल्म में बहुत कुछ है पर मूल बात का नहीं चलता पता

फिल्म का नाम भले `दिलवाले’ हो और भले इसमें शाहरुख खान और काजोल मुख्य किरदार हों- लेकिन इतना तय मानिए कि इसमें दुल्हनिया ले...

‘बाजीराव मस्तानी’ : भव्यता और इतिहास में लिपटी प्रेम कहानी

संजय लीला भंसाली की ये फिल्म भव्यता और इतिहास में लिपटी एक ऐसी प्रेम कहानी है जो धर्म या मजहब की दीवार से टकराती...

बेहद स्‍पेशल फिल्‍म है ‘द साइलेंट हीरोज’

ये एक ऐसी फिल्म है जो लोगों में ये भावना भरना चाहती है कि विकलांगता नाम की चीज सिर्फ मन का वहम है। दूसरे...

समलैंगिकता पर बात करती है ‘Angry Indian Goddesses’

यह एक महिला केंद्रित फिल्म है। शहर में रह रहीं पढ़ी-लिखी भारतीय महिलाओं के क्‍या अरमान हैं और क्‍या वे उन्‍हें पूरा कर पाती...

अच्‍छे विषय पर कमजोर फिल्‍म है कजरया

इसकी पृष्ठभूमि हरियाणा के झज्‍झर जिले की है, जहां लड़कियों का जनसंख्‍या अनुपात लगातार कम होता जा रहा है।

FILM REVIEW: आधुनिक महिलाओं के करियर, सेक्‍स लाइफ से लेकर समलैंगिकता तक पर बात करती है Angry Indian Goddesses

शहर में रह रहीं पढ़ी-लिखी भारतीय महिलाओं के क्‍या अरमान हैं और क्‍या वे उन्‍हें पूरा कर पाती हैं, यही इस फिल्‍म का मुख्‍य...

MOVIE REVIEW: सेक्‍स, नाजायज रिश्‍तों और बदले की कहानी है HATE STORY 3

फिल्म नाजायज रिश्तों की परिधि में जाती है और देर तक वहां रहती है। इसलिए इसमें कामुकता की गंध भी है।

फिल्म समीक्षा: अलग दुनिया में ले जाती है तमाशा

'तमाशा’ कहानी की ताकत को जताने वाली फिल्म है। कहानियां हमें इस लोक में ले जाती हैं, जो रूटीन से अलग होता है। ये...

Film Review, एक्स-पास्ट इज प्रेजेंट: अतीत का आज होना

एक्स-पास्ट इज प्रेजेंट एक प्रयोगशील फिल्म है और इसे ग्यारह निर्देशकों ने निर्दशित किया है। लेकिन इसमें ग्यारह कहानियां नहीं हैं। बल्कि एक ही...

Film Review प्रेम रतन धन पायो: बड़जात्या परिवार का परिवार प्रेम

एक बार फिर से आपके सामने आ गया है ऐसा परिवारिक ड्रामा जिसमें हंसी और नाचगाने अधिक हैं और मारपीट कम। जिसकी कहानी में...

बेहतर नहीं है ”फोर पिलर्स ऑफ बेसमेंट” फिल्म लेकिन हो सकती थी

मनोवैज्ञानिक गुत्थियों और ससपेंस से भरी ये फिल्म कुछ बेहतर हो सकती थी अगर निर्देशक ने मनोविज्ञान पर जम कर काम किया होता।

दमदार नहीं है ”रणबांका”

मरता क्या न करता- पुराना मुहावरा है और रणबांका' को देखकर इसकी याद आती है।

Movie Review: ”चार्ली के चक्कर में” में चक्कर पे चक्कर

अपराध और तहकीकात- इन दो विंदुओं पर टिकी है- चार्ली के चक्कर में'। फिर भी एक असामान्य अपराध कथा।

Movie Review: कॉमेडी से भरपूर है ‘गुड्डु की गन’

हॉलीवुड की फिल्म बैड जॉनसन एंड स्विच' से आइडिया लेकर बनी ये फिल्म भारतीय सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट कैसे पा गई, ये शोध का...

Movie Review: कड़वी सच्चाई को दर्शाती है तितली

समाज में कई तरह की तहें होतीं है और कई तरह के अपराध। जो अपराध कर रहे होतें हैं उनमें भी कई ऐसे होते...

Movie Review: शोभराज की हकीकत को बयां करती है ”मैं और चार्ल्स”

इंडस्ट्री में हमेशा अलग तरह का मसाला परोसने वाले निर्देशक प्रवाल रमन इस बार ऑडियंस के लिए एक नई तरह की थ्रिलर फिल्म लेकर...