Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और पापों का नाश करने वाला माना जाता है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से योगिनी एकादशी का व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, रोगों से राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही इस एकादशी व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना गया है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी 2026 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण का समय…
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योगिनी एकादशी तिथि 2026 (Kab Hai Yogini Ekadashi 2026)
एकादशी तिथि का आरंभ: 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08 बजकर 15 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन: 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक
पारण की टाइमिंग- 11 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 57 मिनट तक होगा
फ्यूचर पंचांग के अनुसार 11 जुलाई को सूर्योदय के तुरंत बाद तिथि समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के नियमों के अनुसार गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग 10 जुलाई, शुक्रवार को ही उपवास रखेंगे। वहीं, वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत का पालन कर सकते हैं।
योगिनी एकादशी पूजा के शुभ मुहूर्त (10 जुलाई 2026)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:54 से 05:26 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:24 से 02:28 बजे तक
- विजय मुहूर्त: शाम 04:35 से 05:39 बजे तक
विष्णु भगवान के मंत्र (Lord Vishnu Mantra):
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
3. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
4. ॐ विष्णवे नम:
5. ॐ हूं विष्णवे नम:
6. ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti):
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
