दिव्य धाम की सीरीज में आज हम बात करने जा रहे हैं यमुनोत्री मंदिर के बारे में, जो हिंदू धर्म के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यमुनोत्री मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। मां यमुना को समर्पित यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन और स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं साल 2026 में यमनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के दिन यानी 19 अप्रैल को खुल गए हैं। मतलब भक्त अब यमनोत्री की यात्रा कर सकते हैं।
मां यमुना का माना जाता है उद्गम स्थल
यमुनोत्री माता यमुना को समर्पित है, जिन्हें सूर्य देव और संज्ञा की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त यमुना जी में स्नान करते हैं या उनके दर्शन करते हैं, उन्हें मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि यहां से बहने वाली यमुना नदी का उद्गम यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है। यहां स्थित सूर्य कुंड का गर्म पानी और दिव्य शिला श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। भक्त यहां प्रसाद के रूप में चावल या आलू गर्म कुंड में पकाकर चढ़ाते हैं।
यमुनोत्री मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा प्रताप शाह द्वारा कराया गया था। हालांकि, यह मंदिर कई बार प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप और हिमस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुआ और बाद में पुनर्निर्माण किया गया।
कैसे पहुंचे यमनोत्री धाम
यमुनोत्री पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, यहां से बस द्वारा जानकी चट्टी तक पहुंचा जा सकता है। वहीं यमनोत्री नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन हैं। साथ ही अगर हम सड़क मार्ग की बात करें तो देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से बस/टैक्सी द्वारा जानकी चट्टी पहुंच सकते हैं। वहां से पैदल, घोड़ा, पालकी या पिट्ठू की सुविधा मिलती है। साथ ही यहां से लगभग 5-6 किमी का ट्रेक करके मंदिर तक पहुंचा जाता है।
यमनोत्री धाम की यात्रा मई-जून और सितंबर-अक्टूबर यात्रा के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है, जबकि जुलाई-अगस्त में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा रहता है। इसलिए इस समय यात्रा करने से बचना चाहिए।
यह भी पढ़ें:
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
