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देवी मां की पूजा में क्यों चढ़ाई जाती है चुनरी, जानिए इसके क्या बताए गए हैं लाभ

मां दुर्गा को लौंग, इलायची, तांबे के बर्तन और हवन सामग्री के साथ चुनरी चढ़ानी चाहिए। माना जाता है कि इससे दुर्गा जी अपने भक्त के जीवन के सारे कष्टों को दूर करती हैं।

Author नई दिल्ली | August 1, 2018 2:22 PM
माता दुर्गा।

देवी मां (दुर्गा जी, लक्ष्मी जी, सरस्वती जी इत्यादि) की पूजा में आपने भक्तों को चुनरी चढ़ाते हुए देखा होगा। ऐसा भी हो सकता है कि आपने खुद भी देवी मां को बड़ी ही श्रद्धाभाव के साथ चुनरी चढ़ाई हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवी मां की पूजा में उन्हें चुनरी क्यों चढ़ाई जाती है? और देवियों को चुनरी चढ़ाने के क्या लाभ बताए गए हैं? यदि नहीं तो आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। कहते हैं कि सनातन धर्म में गृहस्थ जीवन की शुरुआत चुनरी से ही होती है। आपने शादी में वर पक्ष के द्वारा कन्या पक्ष को चुनरी देते हुए देखा होगा। इसके बाद वही लाल रंग की चुनरी पहनकर कन्या शादी के मंडप में आती है। इससे हिंदू धर्म में चुनरी की महत्ता को जाना जा सकता है।

कहते हैं कि लक्ष्मी जी को केसर और कमल के फूलों के साथ सितारों वाली चुनरी चढ़ानी चाहिए। मान्यता है कि इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्त की आर्थिक स्थिति में मजबूती लाती हैं। यदि मां दुर्गा की बात करें तो उन्हें लौंग, इलायची, तांबे के बर्तन और हवन सामग्री के साथ चुनरी चढ़ानी चाहिए। माना जाता है कि इससे दुर्गा जी अपने भक्त के जीवन के सारे कष्टों को दूर करती हैं। और भक्त का जीवन धन्य हो जाता है।

गरुवार के दिन माता लक्ष्मी को लाल चुनरी, केसर, लाल चंदन और लाल फूल की माला चढ़ाने के लिए कहा गया है। कहते हैं कि इस माला को चढ़ाने के बाद अपनी तिजोरी में रख देना चाहिए। इससे खर्च बढ़ने की समस्या पर रोक लगने की मान्यता है। मालूम हो कि काम में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए भी चुनरी के जुड़ा एक उपाय किया जाता है। बताते हैं कि पूर्णिमा के दिन लाल चुनरी में 3 लौंग और 3 कपूर बांधकर लक्ष्मी माता को चढ़ाना चाहिए।

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