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Maha Navami 2018: जानिए क्यों मनाते हैं दुर्गा महानवमी? क्या है इसके पीछे की कहानी

Maha Durga Navami 2018: महानवमी शारदीय नवरात्र का आखिरी दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु हवन तथा कन्या पूजन करते हैं।

Author Updated: October 18, 2018 7:25 AM
Maha Navami 2018: नवरात्र के नवें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता ने देवताओं और अपने भक्तों के समस्त मनोरथों को सिद्ध कर दिया था।

Maha Durga Navami 2018: देशभर में नवरात्र की धूम है। साल में चार बार आने वाले नवरात्र में से शारदीय नवरात्र सभी में सबसे महत्वपूर्ण है। दो गुप्त नवरात्र के अलावा एक नवरात्र चैत्र महीने में भी आता है। शारदीय नवरात्र के बाद दशहरा महापर्व आने के चलते इसे महानवरात्र की संज्ञा दी गई है। 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु व्रत और पूजन से मां को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। नवरात्र के 9वें दिन हवन तथा कन्या पूजन करने का विधान है। शारदीय नवरात्र के आखिरी तीन दिनों में दुर्गा पूजा का महापर्व मनाया जाता है। इन दिनों में लोग दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना करते हैं। सप्तमी से शुरू होने वाले इस पर्व का आखिरी दिन नवमी को होता है। इसलिए, इसे महानवमी कहते हैं। महानवमी के बाद दशहरा पर्व आता है। इस दिन रावण के पुतले जलाए जाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी दशहरे के दिन ही किया जाता है। इसके अलावा इस दिन शस्त्र पूजन की भी परंपरा है।

क्यों मनाते हैं महानवमी – महानवमी शारदीय नवरात्र का आखिरी दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु हवन तथा कन्या पूजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इसी के बाद से उन्हें महिषासुर मर्दिनी कहा जाने लगा था। नवरात्र के नवें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता ने देवताओं और अपने भक्तों के समस्त मनोरथों को सिद्ध कर दिया था। इसी वजह से उन्हें सिद्धिदात्री कहा गया। भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर के संवाद में दुर्गाष्टमी और महानवमी के पूजन का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि महानवमी के दिन युगों-युगों से मां दुर्गा की अराधना होती आ रही है।

कब है महानवमी – साल 2018 में शारदीय नवरात्र की महानवमी 17 अक्टूबर को है। विद्वानों के मुताबिक अगर नवमी तिथि अष्टमी के दिन ही प्रारंभ हो जाए तो नवमी का पूजन अष्टमी के ही दिन किया जाता है। अष्टमी के दिन सायंकाल से पहले नवमी आने पर अष्टमी पूजा, नवमी पूजा और संधि पूजा उसी दिन करने का विधान है। इस साल अष्टमी तिथि 16 अक्टूबर को सुबह 10.16 बजे से 17 अक्टूबर दोपहर 12.49 बजे तक रहेगी। वहीं 17 अक्टूबर को ही दोपहर 12.49 से नवमी लग जाएगी, जो 18 अक्टूबर तो दोपहर 3 बजे तक रहेगी।

 

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