ताज़ा खबर
 

शनि देव को क्यों कहा जाता है ‘न्यायाधीश’, जानिए

कहते हैं कि शनि देव उन लोगों पर प्रसन्न रहते हैं जो मेहनत करते हैं, अनुशासन में रहते हैं, धर्म का पालन करते हैं और सभी का सम्मान करते हैं।

शनि देव।

ज्योतिष शास्त्र में कुल नौ ग्रह बताए गए हैं। इन नौ ग्रहों में शनि देव को न्यायाधीश माना गया है। ये भगवान सूर्य के पुत्र हैं। साथ ही ये मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। मान्यता है कि शनि देव मनुष्य को उसके सभी कर्मों का फल देते हैं। कहते हैं कि शनि देव से कुछ भी छिपा नहीं है, वे हर इंसान को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का फल अवश्य देते हैं। परंतु क्या आप जानते हैं कि शनि देव को न्यायाधीश क्यों कहा जाता है? यदि नहीं तो आगे जानते हैं इसे।

हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव को कर्म प्रधान देवता माना गया है। दरअसल शनि देव मनुष्य को उसके सभी कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि देव के पिता सूर्य देव हैं और इनकी माता का नाम छाया है। साथ ही यमराज इनके भाई और यमुना इनकी बहन हैं। कहते हैं कि शनि देव उन लोगों पर प्रसन्न रहते हैं जो मेहनत करते हैं, अनुशासन में रहते हैं, धर्म का पालन करते हैं और सभी का सम्मान करते हैं। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन तेल के दान की परंपरा है। इसके अलावा हर शनिवार शनि के साथ ही पीपल की पूजा का भी विधान है।

शास्त्रों के अनुसार शनि देव को तेल चढ़ाते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि तेल इधर-उधर न गिरे। इसके अलावा शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए काले तिल का दान किया जाता है। साथ ही चमड़े के जूते और चप्पल का दान करना भी शुभ माना गया है। वहीं शनिवार के दिन शमी के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। इसके पीछे मान्यता ये है कि शमी-पेड़ के पूजन से शनि दोष का प्रभाव कम होता है। साथ ही साथ हर शनिवार हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि-दोष कम होता है।

Next Stories
1 शुक्रवार को न करें ये 4 काम, घर से लक्ष्मी चले जाने की है मान्यता
2 सद्गुरु के अनुसार जानिए ध्यान करते समय नींद से कैसे बचें
3 International Yoga Day 2019: जानिए, गोरखनाथ के ‘हठयोग’ का रहस्य
ये पढ़ा क्या?
X