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रोहिणी व्रत 2019: जानिए, आखिर जैन धर्म समुदाय में क्यों जरूरी है यह व्रत, ये है व्रत विधि

Rohini Vrat: रोहिणी व्रत जैन समुदाय में प्रचलित व्रत में से एक है, जो एक साधारण व्रत होने के स्थान पर एक त्योहार माना गया है। अन्य व्रत की तरह यह व्रत भी महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

Author नई दिल्ली | February 14, 2019 9:32 AM
सांकेतिक तस्वीर।

Rohini Vrat: यदि आपका जन्म जैन समुदाय में हुआ है तो शायद आपने अपने पूर्वजों या फिर घर के बड़ों के मुख से इस व्रत के बारे में सुन रखा होगा। शायद आपकी घर की महिलाएं या आप स्वयं भी इस व्रत का पालन करते हों। रोहिणी व्रत जैन समुदाय में प्रचलित व्रत में से एक है, जो एक साधारण व्रत होने के स्थान पर एक त्योहार माना गया है। अन्य व्रत की तरह यह व्रत भी महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा नहीं है कि इस व्रत को पुरुष नहीं रख सकते, लेकिन जैन परिवारों में महिलाओं के लिए इस व्रत का पालन करना आवश्यक माना गया है।

यह व्रत रोहिणी देवी से जुड़ा है और फलस्वरूप इसी दिन पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जैन समुदाय में मौजूद 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी है। इसलिए जैन समुदाय के अनुयायी उनकी पूजा करते हैं। यह व्रत साल में कम से कम छह से सात बार आता है। लेकिन कई बार हर महीने में एक बार या फिर दो बार भी होता है। इस महीने यह व्रत 14 फरवरी, शुक्रवार को है।

रोहिणी व्रत के बारे जैन शास्त्रों में कुछ खास निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस व्रत के महत्व के बारे में भी बताया गया है। मान्यता के अनुसार यह व्रत महिलाओं द्वारा अपने पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है। साथ ही मां रोहिणी जातक के घर से कंगाली को दूर भगाकर सुख और समृद्धि की वर्षा करें, ऐसी कामना भी की जाती है। व्रत की पूजा के दौरान जातक मां से यह प्रार्थना करता है उसके द्वारा की गई सभी गलतियों को वे माफ करें और उसके जीवन में बने सभी कष्टों का हरण करें। इस व्रत के दौरान पूरे दिन भूखा रहना होता है।

व्रत विधि: रोहिणी व्रत के लिए महिलाएं सुबह सबेरे उठती हैं। स्नान-ध्यान के बाद पवित्र होकर रोहिणी माता की पूजा करती हैं। इस व्रत में भगवान वासुपूज्य की पूजा करने का विधान है। वासुपूज्य की पूजा के बाद एभोग लगाया जाता है। कहते हैं कि इस व्रत का पालन रोहिणी नक्षत्र के दिन से शुरू होकर आगे आने वाले मार्गशीर्ष तक चलता है। रोहिणी व्रत में गरीबों को दान देने का भी महत्व है।

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