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क्यों श्रीकृष्ण से पहले कहा जाता है राधे-राधे, जानें क्या है राधा नाम की महिमा

भगवान शिव को भी नहीं था राधा नाम की महिमा का ज्ञात।

भगवान विष्णु ने बताई राधा नाम की महिमा।

राधा एक ऐसा नाम है जिसके बिना श्री कृष्ण का नाम अधूरा माना जाता है। राधा नाम की महिमा ने अनेकों को परम आनंद की प्राप्ति करवाई है। राधा नाम की महिमा का एक प्रसंग हम आपके सामने लेकर आए हैं कि एक बार राधा कहने से व्यक्ति के कर्म कैसे बदल जाते हैं। एक संत नगर में पधारे तो एक व्यक्ति अपनी समस्या लेकर वहां पहुंचा और कहा कि मेरा बेटा भगवान को नहीं मानता है, कृपया आप ही उसे प्रभु के नाम की महिमा समझाएं। स्वामी उसकी बात मानकर उनके घर आए और उसक व्यक्ति के बेटे से कहा कि राधा नाम कहो। लड़के ने साफ मना कर दिया लेकिन संत ने हार ना मानते हुए बार-बार उससे कहा। तभी लड़के के मुंह से निकला कि मैं राधा क्यों कहूं।

संत इस बात से प्रसन्न होकर चले गए और लड़के से कहा कि यमराज से पूछना कि राधा नाम की महिमा क्या है। मृत्यु के बाद लड़के ने यम से पूछा कि राधा नाम की महिमा बताएं। यम को इसका उत्तर नहीं मालूम था वो उसे इंद्र देव के पास ले गए। उस लड़के की पालकी खुद यम ला रहे थे तो इंद्र ने पूछा कि ये कौन है जिसकी पालकी आप ला रहे हैं। यम ने राधा नाम की महिमा इंद्र से पूछी इसका उत्तर उन्हें भी मालूम नहीं था, इस पर वो उन्हें ब्रह्मा जी के पास लेकर जाते हैं। इसी तरह से ब्रह्मा जी को भी राधा नाम की महिमा नहीं मालूम थी और वो सभी को लेकर भगवान शिव के पास लेकर गए।

भगवान शिव के पास पहुंचने पर सभी ने राधा नाम की महिमा पूछी, भगवान शिव को भी उत्तर ज्ञात नहीं था और वो सभी पालकी लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और सभी देव उस लड़के की पालकी उठा कर विष्णु जी से सवाल किया कि राधा नाम की महिमा क्या है कृपा करके बताएं। भगवान विष्णु ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया कि एक बार राधा नाम लेने की महिमा यही है कि आप सभी देवता इस लड़के की पालकी उठाकर लाए हैं और ये मेरी गोद में बैठने का अधिकारी हो गया है।

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