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गीले कपड़े में क्यों की जाती है मंदिर की परिक्रमा, जानिए

वहीं शास्त्रों में मंदिर की परिक्रमा गीले कपड़े में करने कारण और लाभ बताए गए हैं। जिसके अनुसार घड़ी की सुई की दिशा में किसी मंदिर की परिक्रमा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इमेज क्रेडिट- यूट्यूब।

परंपरागत रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद परिक्रमा करते हैं। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। फिर भी अधिकांश लोग बिन इसकी महत्ता जाने मंदिर की परिक्रमा करते हैं। धर्म ग्रन्थों के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा के बाद मंदिर की परिक्रमा करना अनिवार्य है। क्योंकि इसके पीछे न केवल धार्मिक मान्यता बल्कि वैज्ञानिक मान्यता भी है। लेकिन क्या आप-जानते हैं कि मंदिर में देवी देवताओं के पूजा के बाद मंदिर की परिक्रमा गीले कपड़े में क्यों की जाती है? अगर नहीं, तो आगे हम इसे जानते हैं।

मंदिर की परिक्रमा एक निश्चित संख्या में की जाती है। बिना विधि-विधान के की गई पूजा और परिक्रमा के कारण फल प्राप्ति में कमी आ सकती है। पूंजा-आराधना के साथ ही मंदिर की परिक्रमा करने के पश्चात पूजा पूरी मानी जाती है। साथ ही इसके प्रभाव से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आरती, पूजा, मंत्र और जाप के प्रभाव से मंदिर में एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। जब हम मंदिर की परिक्रमा करते हैं तो हमें मंदिर में उपस्थित सकारात्मक ऊर्जा अधिक मात्र में मिलती है।

वहीं शास्त्रों में मंदिर की परिक्रमा गीले कपड़े में करने कारण और लाभ बताए गए हैं। जिसके अनुसार घड़ी की सुई की दिशा में किसी मंदिर की परिक्रमा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही अधिक लाभ के लिए शास्त्रों में यह बताया गया है कि मंदिर की परिक्रमा गीले कपड़े में करनी चाहिए। इसका कारण ये है कि शरीर जल्दी सूख जाता है जबकि कपड़े ज्यादा देर तक गीले रहते हैं। ऐसे में किसी मंदिर की परिक्रमा गीले कपड़ों में करना सबसे अच्छा है। क्योंकि इस तरह उस स्थान की ऊर्जा को सबसे अच्छे तरीके से ग्रहण कर सकते हैं। यही कारण है कि पहले हर मंदिर में एक जलकुंड जरूर होता था।

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