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Chaitra Navratri 2019: चैत्र नवरात्रि में कीजिए दुर्गा सप्तशती का पाठ, ये है सही विधि

Chaitra Navratri 2019: दुर्गा सप्तशती के पाठ में कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र को भी शामिल करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती-पाठ करने के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए।

Author नई दिल्ली | April 6, 2019 9:31 AM
चैत्र नवरात्रि 2019: देवी दुर्गा।

Chaitra Navratri 2019: साल 2019 में चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल, शनिवार से प्रारंभ हो रही है। इस चैत्र नवरात्रि की समाप्ति 14 अप्रैल 2019, रविवार को होगी। इस बार चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त एक दिन पहले यानि 5 अप्रैल से ही शुरू हो रही है। क्योंकि हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि का आरंभ 5 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से हो जाएगा। यह तिथि अगले दिन अर्थात 6 अप्रैल, शनिवार को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

नवरात्रि के शुभ मुहूर्त में देवी दुर्गा की स्तुति दुर्गा सप्तशती का पाठ करना लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती के शुद्ध पाठ से देवी दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है। आगे जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना क्यों खास माना गया है। साथ ही यह भी जानते हैं कि दुर्गा सप्तशती पाठ की सही विधि क्या है?

दुर्गा सप्तशती सात सौ श्लोकों का संग्रह है। इसमें तेरह अध्याय हैं, और इसमें तीन चरित्र हैं। प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और मध्यम चरित्र। इनमें देवी दुर्गा की स्तुति की गई है। प्रथम चरित्र में पहला अध्याय है। मध्यम चरित्र में दूसरा तीसरा और चौथा अध्याय है। उत्तम चरित्र में पांचवें अध्याय से लेकर तेरहवें अध्याय तक है। प्रथम चरित्र में बीजाक्षर रूप ॐ ऐं है। मध्यम चरित्र में महाकाली का बीजाक्षर मंत्र ह्री है और उत्तर चरित्र में महा सरस्वती का बीजाक्षर मंत्र क्लीं है।

शास्त्रों के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले हर पाठ करने वाले व्यक्ति को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले कलश स्थापना करनी चाहिए। फिर मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा कर उनके सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। फिर इसके बाद दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को लाल आसान पर रखना चाहिए। दुर्गा सप्तशती के पाठ में कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र को भी शामिल करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती-पाठ करने के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए। साथ ही दुर्गा सप्तशती के मंत्र का शुद्ध और सही उच्चारण करना चाहिए। यदि आप संस्कृत में पाठ नहीं कर सकते तो हिंदी में भी पाठ कर सकते हैं।

पाठ धीरे-धीरे करना शुभ माना गया है। दुर्गा सप्तशती के पाठ को प्रथम, मध्यम और उत्तम चरित्र इस क्रम में करने से मनोकामना पूरी होती है। दुर्गा सप्तशती के पाठ को उत्तम, मध्यम और प्रथम क्रम में करने से शत्रु का नाश होता है। साथ ही लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। अगर आप दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ एक दिन में नहीं कर सकते हैं तो एक-एक, दो-दो अध्याय का पाठ भी कर सकते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन और हवन का भी विधान है। इसलिए इसे भी करना उत्तम होगा। इसके अलावा यदि आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हैं तो ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः मंत्र का जप 108 बार कर सकते हैं।

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