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भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म, जानिए

शिव जी के गले में माला की बजाय सांप, सिर पर मुकुट की जगह जटाएं, शरीर पर मलमल के कपड़ों के बजाय बाघ की खाल और शरीर पर चंदन के लेप के बजाय भस्म होती है।

भगवान शिव के शरीर पर चिता की राख होती है।

आपने तस्वीरों में देखा होगा कि राम-सीता, लक्ष्मी-गणेश, विष्णु, ब्रह्मा आदि अनेकों देवता सोने-चांदी से जड़े आभूषणों को धारण करते हैं। लेकिन भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं। आखिर भगवान शिव आभूषण धारण नहीं करते हैं। उनके गले में माला की बजाय सांप, सिर पर मुकुट की जगह जटाएं, शरीर पर मलमल के कपड़ों के बजाय बाघ की खाल और शरीर पर चंदन के लेप के बजाय भस्म होती है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह हैं।

भगवान शिव के शरीर पर चिता की राख होती है। इस भस्म के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना जाता है। इसलिए शव शब्द से शिव नाम बना। इनके अनुसार शरीर नश्वर है और इसे एक दिन इस भस्म की तरह शरीर राख हो जाना है। भगवान शिव जीवन के इसी पड़ाव का सम्मान करते हैं और अपने शरीर पर भस्म लगाकर सम्मान जताते हैं।

इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार जब भगवान शिव और माता सति को यज्ञ के लिए निमंत्रण ना मिलने पर सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था। उस समय भगवान शिव माता सति का शव लेकर धरती से लेकर आकाश तक हर जगह घूमे। भगवान विष्णु शिव की इस दशा को देखकर खुद को परेशान होने से नहीं रोक पाएं और उन्होंने माता सति के शव को छूकर भस्म में बदल दिया। माता सति को याद करने के लिए़ वो राख उन्होंने अपने शरीर पर लगा ली। वहीं माना जाता है कैलाश पर्वत बहुत ठंडा है तो खुद को ठंड से बचाने के लिए शिव भस्म लगाते हैं।

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