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ज्योतिष के अनुसार जानिए क्यों आती है विवाह में अड़चनें?

ज्योतिष के मुताबिक कुंडली का सातवां भाव विवाह को दर्शाता है। माना जाता है कि यदि इस भाव में विकराल ग्रहों की स्थिति हो या वहां राहु-मंगल की युति हो अथवा राहु-सूर्य की युति हो तो विवाह में अड़चनें आती हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: February 6, 2019 2:26 PM
सांकेतिक तस्वीर।

ज्योतिष शास्त्र में विवाह से संबंधित कुछ खास बातें बताई गई है। ये बातें विवाह के योग, इसमें आने वाली बढ़ाएं और अड़चनों से संबंधित हैं। लड़का हो या लड़की इनकी शादी को लेकर अक्सर माता-पिता चिंतित रहते हैं। साथ ही अक्सर ऐसा देखने-सुनने में आता है कि कई बार विवाह के योग नहीं बन पाते हैं। विवाह के लिए तमाम रिश्ते आते हैं, बात बनने को होती है और कई बार तो बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। आखिर वो कौन से ऐसे कारण होते हैं जिसकी वजह से विवाह में देरी या अड़चनें आती हैं? आगे ज्योतिष के अनुसार जानते हैं कि आखिर किस वजह से विवाह में अड़चनें आती हैं।

ज्योतिष के मुताबिक कुंडली का सातवां भाव विवाह को दर्शाता है। माना जाता है कि यदि इस भाव में विकराल ग्रहों की स्थिति हो या वहां राहु-मंगल की युति हो अथवा राहु-सूर्य की युति हो तो विवाह में अड़चनें आती हैं। साथ ही कई बार राहु और सूर्य की स्थिति से ग्रहण योग बनता है जो शादी-विवाह में देरी और अड़चन का कारण होता है। इसके अलावा कुंडली में मांगलिक योग का बनना भी शादी में अड़चनें या देरी का कारण होता है।

ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली के पहले भाव, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में यदि मंगल विराजमान हो तो ऐसा जातक मांगलिक होता है। मांगलिक जातकों के लिए लग्न कुंडली से मांगलिक की स्थिति देखी जाती है। वहीं हथेली के अंगूठे का क्षेत्र का शुक्र का माना गया है। ज्योतिष के अनुसार जब यह क्षेत्र कटा-फटा, अधिक धंसा या जालीदार रेखाओं से युक्त होता है तो ऐसी स्थिति में भी विवाह से संबंधित समस्याएं पैदा होती हैं।

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