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रामायण: जानिए, कौन थी श्रीराम की सगी बहन

एक दिन जब राजा रोमपाद अपनी पुत्री शांता के साथ खेल रहे थे तभी एक गरीब ब्राह्मण उनके द्वार पर आया। वह राजा से अपनी खेती के लिए मदद मांगने आया था। परंतु पुत्री शांता के संग व्यस्त होने के कारण राजा रोमपाद ने उसकी बात नहीं सुनी थी।

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वैसे तो हम भगवान श्रीराम, उनकी पत्नी सीता, उनके माता-पिता और उनके भाइयों के बारे में जानते हैं। परंतु आज भी बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान श्रीराम की एक बहन भी थी। रामायण में भी इस बात का जिक्र है कि भगवान श्रीराम की एक सगी बहन थी। जो उनसे उम्र में काफी बड़ी थी। साथ ही उनकी माता भी श्रीराम की माता कौशल्या देवी ही थीं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि भगवान राम की सगी बहन कौन थी?

रामायण के अनुसार यह बात भगवान श्रीराम के जन्म से बहुत पहले की है। तब राजा दशरथ के एक ही संतान थी। जिसका नाम शांता रखा गया। कहा जाता है कि अंगदेश के राजा रोमपाद और उनकी पत्नी वार्षिणी एक बार भ्रमण करते हुए अयोध्या आए थे। अयोध्या में जब उनकी मुलाकात राजा दशरथ से हुई तो बातचीत के दौरान राजा दशरथ को यह पता चला कि राजा रोमपाद के कोई संतान नहीं हैं। इस कारण वह पति-पत्नी दोनों बड़े ही चिंतित रहते हैं। राजा दशरथ से लोमपाद और उनकी पत्नी की यह पीड़ा देखी नहीं गई और उन्होंने अपनी एकलौती पुत्री शांता को उन्हें संतान रूप में सौंप दिया था। जिसके बाद राजा रोमपाद और उनकी पत्नी वार्षिणी पुत्री के रूप में शांता को पाकर बहुत खुश हुए थे।

शांता के आ जाने से राजा लोमपाद के महल में जैसे खुशियां आ गई थी। राजा रोमपाद और उनकी पत्नी दोनों ही हमेशा शांता के साथ ही अपन समय बिताते थे। एक दिन जब राजा रोमपाद अपनी पुत्री शांता के साथ खेल रहे थे तभी एक गरीब ब्राह्मण उनके द्वार पर आया। वह राजा से अपनी खेती के लिए मदद मांगने आया था। परंतु पुत्री शांता के संग व्यस्त होने के कारण राजा रोमपाद ने उसकी बात नहीं सुनी थी। द्वार पर आए उस ब्राह्मण की याचना न सुनने से राज्य के सभी ब्राह्मणों को बहुत दुख हुआ। इस कारण अंग देश के सभी ब्राह्मण राजा रोमपाद का राज्य छोड़कर दूसरे राज्यों में चले गए। वे सभी ब्राह्मण देवराज इन्द्र के भक्त थे। इस कारण अपने भक्तों की ऐसी अनदेखी देखकर इन्द्र देव राजा रोमपाद पर क्रोधित हो गए। जिसके बाद उन्होंने अंग देश में होने वाली वर्षा को रोक दिया था।

वर्षा न होने से अंग देश के किसानों के खेतों में खरी फसल मुरझाने लगी थी। ऐसी संकट की घड़ी में राजा लोमपाद घबराकर शृंगी ऋषि की शरण में गए। तब शृंगी ऋषि ने देवराज इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ सम्पन्न होने के बाद देवराज इन्द्र प्रसन्न हुए थे। तब जाकर रोमपाद के राज्य में वर्षा हुई थी। राज्य में वर्षा होने से राजा रोमपाद इतने प्रसन्न हुए थे कि उन्होंने अपनी पुत्री शांता का विवाह शृंगी ऋषि के साथ करा दिया था।

काफी समय गुजर जाने के बाद इधर राजा दशरथ और उनकी तीनों रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहने लगी थी कि उनके कोई संतान नहीं हैं। साथ ही उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। तब ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को यह सलाह दी थी कि वह अपने दामाद ऋषि शृंगी से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाए। राजा दशरथ में ऋषि वशिष्ठ की सलाह मानकर पुत्रकामेष्टि यज्ञ के लिए ऋषि शृंगी को आमंत्रित किया था। शृंगी ऋषि ने जब राजा दशरथ के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया था तब राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन जैसे पुत्र की प्राप्ति हुई।

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