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कहानी राजीव दीक्षित की: हार्ट अटैक से मौत पर अब भी विवाद, जानिये उस दिन बाबा रामदेव से क्या बात हुई थी

राजीव दीक्षित ने आजादी बचाओ आन्दोलन और विदेशी कम्पनियों के खिलाफ स्वदेशी आन्दोलन की भी शुरुआत की थी।

कहानी राजीव दीक्षित की: हार्ट अटैक से मौत पर अब भी विवाद, जानिये उस दिन बाबा रामदेव से क्या बात हुई थी
राजीव दीक्षित (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

राजीव दीक्षित आयुर्वेद और योग के अच्छे ज्ञाता थे। वे स्वदेशी के हिमायती थे और देश में बनी वस्तुओं को बढ़ावा देने की बात किया करते थे। अपनी सभाओं और कार्यक्रमों में लोगों को एलोपैथी को छोड़कर आयुर्वेद को अपनाने की सलाह दिया करते थे।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले राजीव दीक्षित का जन्म 30 नवंबर 1967 को हुआ था। दावा किया जाता है कि उन्होंने इलाहाबाद से बी.टेक और आईआईटी, कानपुर से एमटेक की पढ़ाई की थी। इसी दौरान उन्होंने स्वदेशी को लेकर अभियान शुरू किया। देश-विदेश में 13 हजार से अधिक व्याख्यान दिये।

एक दौर में राजीव दीक्षित की लोकप्रियता बाबा रामदेव से भी ज्यादा थी। साल 2010 में जब अचानक उनका देहांत हुआ तो किसी को भरोसा नहीं हुआ। राजीव दीक्षित एक व्याख्यान के लिए छत्तीसगढ़ गए थे। वे दुर्ग जा रहे थे, रास्ते में उनकी तबीयत खराब होने लगी और दिल का दौरा पड़ा। जिसके बाद उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया।

किसी ने कहा हत्या तो किसी ने साजिश: राजीव दीक्षित की अचानक मौत के बाद तमाम तरह की थ्योरी सामने आईं। उनके समर्थकों ने हत्या और साजिश की आशंका जताई। साजिश का आरोप भी बाबा रामदेव पर लगा। लेकिन दीक्षित का निधन कैसे हुआ था, इसकी ठोस वजह आजतक पता नहीं चल पाई।

आरोपों से इतर, राजीव दीक्षित और बाबा रामदेव के बीच काफी नजदीकी भी थी। दोनों ने साथ भारत स्वाभिमान आंदोलन की शुरुआत की थी। राजीव दीक्षित इस ट्रस्ट में सचिव थे। आंदोलन के वक्त तय किया गया था कि साल 2014 में वे देश को एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे।

निधन वाले दिन हुई थी बाबा रामदेव से बात: बाबा रामदेव तमाम मौकों पर राजीव दीक्षित की हत्या में साजिश के आरोपों को निराधार बताते हुए कहते रहे हैं कि निधन वाले दिन खुद उनकी दीक्षित से बात हुई। जब तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने, दीक्षित को एलोपैथी दवा लेने का सुझाव दिया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था।

मृत्यु पर बना बना हुआ है विवाद: एक रिपोर्ट ने मुताबिक राजीव के साथ मौजूद और डॉक्टर्स ने बताया कि जब उन्हें दिल का दौरा पड़ा था तो उन्होंने एलौपैथी इलाज लेने से मना कर दिया था। कुछ लोग यह दावा भी करते हैं कि मौत के बाद उनका शरीर नीला पड़ गया था।

सवाल इस बात पर भी उठा कि दीक्षित की मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया, बल्कि वैसे ही उनके घर भेज दिया गया। उनके परिजनों ने भी साजिश की आशंका जताई थी और पीएम तक से गुहार लगाई थी।

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