Blue Sapphire Benefits and Effects: वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक, जेल आदि का कारक माना जाता है। साथ ही यह मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। साथ ही  तुला राशि शनि की उच्च राशि है जबकि मेष इसकी नीच राशि मानी जाती है। शनि का गोचर एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहता है। वहीं नीलम रत्न का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है।

मान्यता है नीलम पहनने से शनि दोष और साढ़ेसाती के प्रभाव कम हो सकते हैं। साथ ही नीलम रत्न पहनने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है। इसके अलावा जिन लोगों को रात में घबराहट या भय लगता है। यदि वह नीलम धारण करें तो उन्हें अवश्य लाभ मिल सकता है। वहीं डिसीजन मेकिंग मजबूत होती है। नीलम धारण करने की सही विधि, पहचान और इसके लाभ…

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नीलम रत्न इन राशियों को हो सकता है शुभ

रत्न शास्त्र अनुसार नीलम रत्न कुंभ और मकर राशि के लोग धारण कर सकते हैं, क्योंकि इन राशियों पर शनि देव का आधिपत्य माना गया है। लेकिन फिर भी अच्छे ज्योतिषी को कुंडली दिखा लें। वहीं वृष, मिथुन, कन्या, तुला राशि के लोग भी नीलम धारण कर सकते हैं। लेकिन यहां हम ये जरूर देख लें कि शनि देव आपकी जन्मकुंडली में किस राशि में विराजमान हैं।

 वहीं शनि देव कुंडली में कमजोर स्थित हो तो भी नीलम पहन सकते हैं। साथ ही अगर शनि देव शुभ (उच्च) के कुंडली में विराजान हैं, तो भी नीलम धारण किया जा सकता है। साथ ही अगर आप शनि की महादशा चल रही हो और शनि देव जन्मकुंडली में सकारात्मक स्थित हैं तो नीलम धारण कर सकते हैं। वहीं नीलम के साथ माणिक्य, मोती और मूंगा धारण करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

नीलम पहनने से मिलते हैं ये लाभ 

नीलम रत्न धारण करने से व्यक्ति मेहनती और परिश्रमी बनता है। नीलम धारण करने के साथ ही व्यक्ति को आर्थिक लाभ होने लगता है और नौकरी, व्यवसाय में उन्नति होने के संकेत मिलने लगते हैं। वहीं जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती है, वो लोग भी नीलम धारण कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों में धैर्य की कमी रहती है और वह हर काम में जल्दबाजी करते है जिससे कई काम उनके बिगड़ जाते हैं। ऐसे लोग भी नीलम धारण कर सकते हैं।

वहीं नीलम रत्न पहनने से मानसिक शांति मिलने की मान्यता है और तनाव कम हो सकता है। यदि कोई स्त्री या पुरुष डिप्रेशन का शिकार हैं तो उन्हें नीलम जरूर पहनना चाहिए। नीलम आपके मन को शांत कर सकता है और आप तनावमुक्त महसूस करेंगे। नीलम रत्न को पहनने से शनि दोष और साढ़ेसाती के प्रभाव कम हो सकते हैं। साथ ही आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता बढ़ती है। 

नीलम धारण करने के नियम

नीलम रत्न पहनने से पहले कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।

  • नीलम हमेशा शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। साथ ही आप इसे शनि की होरा में भी धारण कर सकते हैं।
  • इसे चांदी या पंचधातु की अंगूठी में पहनना लाभकारी माना जाता है।
  • धारण करने से पहले रत्न को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए।
  • अंगूठी को मध्यमा उंगली में पहनना शुभ माना जाता है
  • धारण करते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • साथ ही धारण करने के बाद शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।

असली नीलम की पहचान कैसे करें

आजकल बाजार में नकली रत्न भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इसलिए असली नीलम की पहचान करना जरूरी है। असली नीलम का रंग गहरा और साफ नीला होता है। इसमें अधिक धुंधलापन या दरारें नहीं होतीं। असली नीलम बहुत चमकदार और पारदर्शी होता है। प्रमाणित जेमोलॉजिकल लैब से प्रमाणपत्र लेना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। वहीं बाजार में सीलोनी और बैंकाक के नीलम आसानी से मिल जाते हैं। जिसमें सीलोनी नीलम मंहगा होता है। 

1- नीलम बहुत कठोर होता है। मतलब इसकी हार्डनेस 9 होती है। तो इसे किसी साधारण कांच या लोहे की वस्तु से खरोंचने पर नीलम पर खरोंच नहीं आएगी। वहीं नीलम नकली है तो खरोंच आ सकती है। 

2- असली नीलम को पहचानने की दूसरी विधि यह कि आफ अंधेरे कमरे में नीलम पर टॉर्च की रोशनी डालें। यदि पत्थर के अंदर से केवल नीला प्रकाश ही निकले तो यह असली है। वहीं अगर नीलम नकली है तो कई रंग निकल सकते है।  

नीलम रत्न नोट

आपको बता दें की जैसे ही आप नीलम धारण करेंगे उसके 24 घंटे के अंदर-अंदर ही अपना प्रभाव दिखाने लगता है। यदि ये आपके लिए अनूकुल नहीं है तो आपको आंखो में तकलीफ महसूस होने लगेगी। साथ ही दुर्घटनाएं और शारीरिक कष्ट भी बढ़ने लगता है। इसलिए किसी एकस्पर्ट से राय लेने के बाद ही इसे धारण करें। वहीं नीलम रत्न आपको सूट कर रहा है या नहीं, इसके लिए नीलम रत्न को काले कपड़े में बांधकर सोने से पहले तकिए के नीचे रख लें। अगर आपको कोई बुरा सपना नहीं आ रहा है, तो फिर आप धारण कर सकते हैं।

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डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें