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देवमंदिर, श्मशान और अंधेरे कमरे में सोने के लिए क्यों किया जाता है मना, जानिए

विष्णुस्मृति में भी नींद के संदर्भ में कई बातें कही गई हैं। इसके अनुसार किसी सोए हुए व्यक्ति को अचानक नींद से नहीं जगाना चाहिए।

Author नई दिल्ली | September 10, 2018 3:54 PM
सांकेतिक तस्वीर।

प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि सोते वक्त उसे अच्छी नींद आए। लेकिन हर बार ऐसा नहीं हो पाता। आपने कुछ लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि देवमंदिर, श्मशान और अंधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों कहा जाता है? यदि नहीं तो आज हम इसी बारे में विस्तार से आपको बताने वाले हैं। मनुस्मृति में भी सोने को लेकर कई तरह की बातें कही गई हैं। इसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को सूने घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति के ऊपर नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं। यह माना जाता है कि मंदिर में सात्विकता ज्यादा होती है और नींद का संबंध तमोगुण से है। गीता में कहा गया है कि तमोगुण से व्यक्ति के अंदर आलस्य की उत्पत्ति होती है। इसलिए देवमंदिर और श्मशान में सोने के लिए मना किया जाता है।

देवता की मूर्ति के सामने भी सोने के लिए मना किया गया है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि देवमूर्ति में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है। जबकि सामान्य व्यक्ति के शरीर में तुलनात्मक रूप से बहुत कम सात्विकता होती है। बताते हैं कि ऐसी दशा में मूर्ति से निकलने वाली ऊर्जा को हमारा शरीर सहन नहीं कर पाता है। कहते हैं कि जो लोग प्रतिदिन मंदिर में सोते हैं उन्हें शरीर में भारीपन सा महसूस होने लगता है।

विष्णुस्मृति में भी नींद के संदर्भ में कई बातें कही गई हैं। इसके अनुसार किसी सोए हुए व्यक्ति को अचानक नींद से नहीं जगाना चाहिए। इसके लिए व्यक्ति को प्यार से और धीरे-धीरे जगाने के लिए कहा गया है। पद्मपुराण में यह कहा गया है कि अंधेरे कमरे में कभी भी नहीं सोना चाहिए। इसके साथ ही आग जलाने वाली जगह पर भी सोने के लिए मना किया गया है। शास्त्रों में नए कपड़े पहनकर सोने के लिए भी मना किया गया है।

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