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महाभारत: जब कर्ण ने दिया था अर्जुन को ये जीवनदान, जानिए

कर्ण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह एक आदर्श दानवीर था। क्योंकि कर्ण ने कभी भी किसी मांगने वाले को दान में देने से कुछ माना नहीं किया।

Author नई दिल्ली | February 4, 2019 12:55 PM
तस्वीर महाभारत युद्ध को दर्शाती हुई।

कर्ण महाभारत के ऐसे पात्र हैं जिससे बिना महाभारत अधूरा माना जाता है। इनके पिता सूर्यदेव और माता कुंती थी। कर्ण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह एक आदर्श दानवीर था। क्योंकि कर्ण ने कभी भी किसी मांगने वाले को दान में देने से कुछ माना नहीं किया। भले ही इसके परिणामस्वरूप उसके अपने ही प्राण संकट में क्यों न पड़ गए हो। कहते हैं कि उनका पालन एक रथ चलाने वाले ने किया था इसलिए वे सूत पुत्र कहलाए। साथ ही शायद यही कारण था कि कर्ण को वो सम्मान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। जानते हैं महाभारत का वह प्रसंग जब कर्ण से अर्जुन को जीवनदान दिया था।

महाभारत के युद्ध मेन कर्ण भले ही अधर्म के पक्ष में खड़े थे। परंतु उनके अंदर माता कुंती और सूर्यदेव का अंश था। कर्ण ने कई जगहों पर अपनी नैतिकता का परिचय दिया था। भगवान श्रीकृष्ण हर समय यह प्रयास करने की कोशिश करते कि युद्ध में कहीं अर्जुन और कर्ण का एक दूसरे से सामना न हो जाए। जब एक बार कुरुक्षेत्र में अर्जुन और कर्ण का सामना एक दूसरे से हो ही गया तो दोनों एक दूसरे पर तीरों की वर्षा करने लगे। एक भयंकर युद्ध होने लगा और कर्ण अर्जुन पर भारी होने लगे।

कर्ण ने अर्जुन को लगभग परास्त कर दिया था। इसी बीच कर्ण अर्जुन पर एक घातक बाण छोड़ने वाले थे तभी सूर्यास्त हो गया। फिर कर्ण ने अपने बाण रोक लिए। यह एक ऐसा बाण था जिसे सूर्यास्त के बाद अगर अर्जुन पर चला देते तो निश्चित रूप से अर्जुन की मृत्यु हो जाती। लेकिन कर्ण ने ऐसा नहीं किया। साथ ही युद्ध के नियम को नहीं तोड़ा। इस तरह से कर्ण नैतिकता का पालन करते हुए अर्जुन को जीवनदान दे दिया।

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