ताज़ा खबर
 

Ramadan 2019: जानिए, क्या होता है जकात और क्यों इसे हर मुसलमान के लिए माना गया है अनिवार्य

Ramadan 2019: फकीर वह सख्स है जिसकी आमदनी 10 हजार रुपए सालाना है और उसका खर्च 21 हजार रुपए सालाना है। यानि वह सख्स जिसकी आमदनी कुल खर्च से आधे से भी कम है।

रमजान 2019: जानिए, क्या होता है जकात और क्यों इसे हर मुसलमान के लिए माना गया है अनिवार्य।

रमजान का महीना शुरू हो गया है। सोमवार यानि 06 मई 2019 को इसका पहला दिन होगा। इस पाक महीने में हर मुसलमान अपने साल भर की कमाई की जकात निकालते हैं। इस्लामिक ग्रन्थों के अनुसार अल्लाह ने फरमाया है जकात इंसान की कमाई में गरीबों और मसकीनों का हक है। जकात का मतलब दान होता है। रमजान के अरसे में हर मुसलमान के लिए जकात अनिवार्य माना गया है। परंतु क्या आप जानते हैं कि जकात क्या होता है? और इसे हर मुसलमान के लिए अनिवार्य क्यों माना गया है? साथ ही इसे किसे देना चाहिए? यदि नहीं तो आगे इसे जानिए।

जकात अल्लाह के लिए एक मलकायिक हिस्सा होता है जिसे शरीयत ने तय किया है। उसका मुसलमान फकीर को मालिक बना देना शरीयत में जकात कहलाता है। जकात निकालने के बाद सबसे बड़ा मसला यह आता है कि इसे किसको दिया जाना चाहिए। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जकात देते वक्त इस बात का ख्याल रहना चाहिए कि यह उसे ही दें जिसे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। वह सख्स जिसकी आमदनी कम हो और उसका खर्च ज्यादा हो, अल्लाह ने उसके लिए कुछ पैमाने और ओहदे तय किए हैं। जिसके हिसाब से हर सख्स को अपनी जकात देनी चाहिए। इसके अलावा और जगह भी बताई गई है जहां व्यक्ति जकात के पैसे का इस्तेमाल कर सकता है। सबसे पहले जकात का हकदार फकीर है।

फकीर वह सख्स है जिसकी आमदनी 10 हजार रुपए सालाना है और उसका खर्च 21 हजार रुपए सालाना है। यानि वह सख्स जिसकी आमदनी कुल खर्च से आधे से भी कम है। दूसरा नंबर है मिसकीन का। मिसकीन वो सख्स है जो फकीर से थोड़ा अमीर है। वह सख्स जिसकी आमदनी दस हजार रुपए सालाना है और उसका खर्च 15 हजार रुपए सालाना है। तीसरा है- तारीक-ए-क्लब। तारीक-ए-क्लब उन लोगों को कहते हैं जो लोग जकात की वसूली करते हैं और उसको बांटते हैं। यह लोग आमतौर पर उन देशों में होते हैं जहां पर इस्लामिक हुकूमत लागू होता है। चौथा है गदर्म को छुड़ाना। पहले वक्त में गुलाम और बंदियां रखी जाती थी। जो बहुत बड़ा गुनाह था। अल्लाह की नजर में हर इंसान का दर्जा बराबर है। इसलिए मुसलमानों को हुक्म दिया गया है कि अपनी जकात का इस्तेमाल ऐसे गुलामों को छुड़ने के लिए करें।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 यहां नहीं होती है प्रभु राम की पूजा, जानिए इस मंदिर का रहस्य
2 Ramadan 2019: जानिए, क्यों रखा जाता है ‘रोजा’? ये है रमजान से जुड़ी मान्यताएं
3 Parshuram Jayanti 2019: भगवान परशुराम जैसे सामर्थ्य से ही संचालित की जा सकती है समकालीन दुनिया
IPL 2020 LIVE
X