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जानिए, क्या है अमरनाथ गुफा में दो कबूतरों का रहस्य

इस पावन गुफा में बर्फीली बूंदों से बनने वाले इस हिम शिवलिंग को दैवीय चमत्कार के रूप में भी माना जाता है। कहते हैं कि इस गुफा में कबूतर का एक जोड़ा सदियों से मौजूद है।

Author नई दिल्ली | Published on: February 1, 2019 5:32 PM
अमरनाथ गुफा।

अमरनाथ धाम एक ऐसा शिव धाम है जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात अमरनाथ गुफा में विराजमान हैं। यह धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। इस पावन गुफा में बर्फीली बूंदों से बनने वाले इस हिम शिवलिंग को दैवीय चमत्कार के रूप में भी माना जाता है। कहते हैं कि इस गुफा में कबूतर का एक जोड़ा सदियों से मौजूद है। क्या आपको पता है कि इस गुफा में भगवान शिव कैसे पधारे थे? साथ ही इस गुफा में मौजूद कबूतर के जोड़े का क्या रहस्य है? यदि नहीं, तो रहस्य को जानते हैं।

एक बार माता पार्वती ने महादेव से पूछा कि ऐसा क्यों है कि आप अजर-अमर है और आपके गर्दन में पड़ी नरमुंड की माला माला का रहस्य क्या है? इस पर महादेव ने पार्वती के सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझा। इसलिए उन्होंने उस बात को टालने की कोशिश की, लेकिन पार्वती की जिद के कारण इस रहस्य को बताना स्वीकार किया। कहते हैं कि इस रहस्य को बताने के लिए भगवान शिव को एक एकांत जगह की आवश्यकता थी। जिसे तलाश करते हुए वो माता पार्वती को लेकर आगे बढ़ते चले गए। गुप्त स्थान की तलाश में महादेव ने अपने वाहन नंदी को सबसे पहले छोड़ा। नंदी जिस जगह पर छूटा उसे ही पहलगाम कहा जाने लगा। जहां से अमरनाथ यात्रा शुरू होती है। यहां से कुछ आगे जाने पर शिव जी ने अपने माथे से चंद्रमा को अलग कर दिया।

जिस जगह पर उन्होंने ऐसा किया वह चंदनवाड़ी कहलाती है। इसके बाद गंगा जी को पंचतरणी में और गले के सांपों को शेषनाग पर छोड़ दिया। जिस कारण इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा। अमरनाथ यात्रा का अगला पड़ाव गणेश टॉप है। मान्यता है कि इस स्थान पर शिव ने अपने पुत्र गणेश को छोड़ा था। इस प्रकार इन पांच चीजों को पीछे छोड़ने के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ उस गुफा में प्रेवेश किया। इसमें कोई भी तीसरा प्राणी इसमें प्रवेश न कर पाए इसलिए शिव ने गुफा के चारों ओर अग्नि प्रज्ज्वलित कर दिया। जिसके बाद महादेव ने जीवन के उस गूढ रहस्यों की कथा शुरू कर दी।

मान्यता है कि कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई। उस समय वो कथा दो सफेद कबूतर सुन रहे थे। जब कथा समाप्त हुई और भगवान शिव का ध्यान माता पार्वती पर गया तो उन्होंने पार्वती जी को सोया हुआ पाया। तब महादेव की नजर उन दोनों कबूतरों पर पड़ी। जिसे देखते ही महादेव को उन पर क्रोध आ गया। फिर दोनों कबूतर महादेव के पास आकार बोला कि हमने आपकी अमर कथा सुनी है, यदि आप हमें मार देंगे तो आपकी कथा झूठी हो जाएगी। कहते हैं कि इस पर महादेव ने उस कबूतरों को वर दिया कि वो सदैव उस स्थान पर शिव और पार्वती के प्रतीक के रूप में रहेंगे।

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