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सद्गुरु के प्रवचन के इस भाग से जानिए, क्या है डिप्रेशन की वजह

सद्गुरु अपने प्रवचन में आगे कहते हैं कि यदि कोई एक पल के लिए भी गुस्सा करता है तो उसे समझ लेना चाहिए कि वह बीमार है।

सांकेतिक तस्वीर।

सद्गुरु के अनुसार यदि कोई व्यक्ति खुद के लिए अवसाद या डिप्रेशन पैदा करने में सक्षम है तो वह अपने भीतर काफी सारी भावनाएं और विचार पैदा करता है लेकिन गलत दिशा में। अगर किसी व्यक्ति को किसी चीज के लिए बहुत गहरी भावनाएं और तीव्र विचार न हो तो वह डिप्रेशन में नहीं जा सकता। सद्गुरु कहते हैं कि अधिकतर रोग खुद के बनाए होते हैं। कुछ लोग शारीरिक रूप से बीमार रहते हैं उनके पास कोई चारा नहीं है।

सद्गुरु अपने प्रवचन में आगे कहते हैं कि यदि कोई एक पल के लिए भी गुस्सा करता है तो उसे समझ लेना चाहिए कि वह बीमार है। यदि किसी व्यक्ति को कोई इन्फेक्शन भी हो जाए और यदि वह अपने मन को एक खास तरीके से रखना जानता है तो उस पर वह वाइरस या बैक्टीरिया अपना असर नहीं दिखाएगा। यदि व्यक्ति खुद को इस तरह से तैयार कर ले कि भले ही कुछ हो जाए मुझे अपने कम को पूरा करना है तो वह हर हाल में पूरा हो सकता है। आगे सद्गुरु कहते हैं कि मौसम के बदलाव के साथ अगर व्यक्ति के पास कंबल ओढ़कर लेटने का सुख है और यदि वह ऐसा करने लगे तो उसका शरीर बीमार पड़ना सीख लेगा।

अगर व्यक्ति यह तय कर ले कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या हो रहा है तो ऐसे में व्यक्ति का शरीर अपने आप ठीक हो जाएगा। प्रवचन में आगे सद्गुरु कहते हैं कि व्यक्ति को अपनी सेहत के लिए जरूरी परिस्थियों को स्थापित करना चाहिए। सेहत के लिए जरूरी प्रेरणाओं और फायदों को अपने और अपने बच्चों के लिए भी स्थापित करना चाहिए। फिर आगे सद्गुरु कहते हैं कि समय आ गया है जब व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक, रासायनिक और ऊर्जा के आधार पर यह समझना होगा कि बीमार, मायूस और दुखी होने से कोई फायदा नहीं होगा। खुश और आनंदित रहने में ही फायदा है।

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