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जानिए, शमी के पेड़ से शनिदेव का क्या है संबंध, क्यों इसे चढ़ाने से शनि होते हैं प्रसन्न?

हिन्दू धर्म शास्त्रों में शमी के पेड़ का खास महत्व बताया गया है। माना जाता है कि शमी के पेड़ की पूजा करने से घर में शनि का प्रकोप कम होता है। यूं तो शास्त्रों में शनि के प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय बताएं गए हैं। लेकिन इन सभी उपायों में से […]

शमी-पेड़ और शानिदेव।

हिन्दू धर्म शास्त्रों में शमी के पेड़ का खास महत्व बताया गया है। माना जाता है कि शमी के पेड़ की पूजा करने से घर में शनि का प्रकोप कम होता है। यूं तो शास्त्रों में शनि के प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय बताएं गए हैं। लेकिन इन सभी उपायों में से प्रमुख उपाय है शमी के पेड़ की पूजा। ज्योतिष के अनुसार घर में शमी का पौधा लगाकर पूजा करने से कामों में आने वाली रुकावट दूर होती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि शमी के पेड़ में शनिदेव का वास होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि शमी के पेड़ से शनिदेव का क्या संबंध है? साथ ही इसे चढ़ाने से शानि क्यों प्रसन्न होते हैं? चलिए आज इसे जानते हैं।

शमी पेड़ की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है। शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को पेड़ के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। शमी को गणेश जी का प्रिय पेड़ माना जाता है। इसलिए भगवान गणेश की आराधना में शमी के पेड़ की पत्तियों को अर्पित किया जाता है। भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग की जाने वाली इस पेड़ की पत्तियों का आयुर्वेद में भी महत्व है।

आयुर्वेद की नजर में शमी अत्यंत गुणकारी औषधि है। कई रोगों में इस वृक्ष के अंग काम लिए जाते हैं। उत्तर भारत के बिहार और झारखंड में सुबह के समय उठने के बाद शमी के पेड़ के दर्शन को शुभ माना जाता है। बिहार और झारखंड में यह पेड़ अधिकतर घरों के दरवाजे के बाहर लगा हुआ मिलता है। लोग किसी भी काम पर जाने से पहले इसके दर्शन करते और इसे माथे से लगाते हैं, ऐसे करने से उन्हें उस काम में कामयाबी मिलती है। शमी के पेड़ पर कई देवताओं का वास होता है। सभी यज्ञों में शमी पेड़ का उपयोग शुभ माना गया है। शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए होता है। शमी के पांच अंग, यानी फूल, पत्तियों, जड़, टहनियों और रस का इस्तेमाल कर शनि संबंधी दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है।

दशहरे पर शमी के पेड़ के पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र में भी शमी के पेड़ की पत्तियों से पूजन करने का महत्व बताया गया है। नवरात्र के नौ दिनों में प्रतिदिन शाम के समय पेड़ का पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले शमी के वृक्ष के सामने अपनी विजय के लिए प्रार्थना की थी। शमी की पूजा के साथ ही एक सवाल यह भी है कि इस पेड़ को घर में किस तरफ लगाना चाहिए। शमी के पेड़ को घर के मुख्य दरवाजे के बांयी तरफ लगाएं। इसके बाद नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर-परिवार के सभी सदस्यों पर हमेशा शनि की कृपा बनी रहती है।

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