Kaalsarp Dosh Kya Hota He: वैदिक ज्योतिष अनुसार जब भी किसी व्यक्ति का जन्म होता है, तो उसके जन्म समय और जन्मतिथि के अनुसार उसकी कुंडली का निर्माण किया जाता है। साथ ही इस कुंडली में ग्रह कुछ शुभ ग्रह बनाते हैं तो कुछ अशुभ योग का निर्माण होता है। इन अशुभ और शुभ योगों का प्रभाव मानव जीवन पर पर पड़ता है। यहां हम आज बात करने जा रहे हैं एक अशुभ योग के बारे में, जिसको कालसर्प दोष कहा गया है। यह योग राहु और केतु बनाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह दोष व्यक्ति के संघर्ष, मानसिक दबाव और जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों से जुड़ा माना जाता है। मतलब इस योग के कुंडली में होने से व्यक्ति को जीवनभर संघर्ष का सामना करना पड़ता है। साथ ही व्यक्ति को कारोबार में घाटा जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। वहीं व्यक्ति को गंभीर रोग हो सकते हैं। आइए जानते हैं कुंडली में कैसे बनता है कालसर्प दोष और इसके उपाय…
कैसे बनता है कालसर्प दोष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच जब सभी ग्रह आ जाते हैं तब काल सर्प दोष नामक योग का निर्माण होता है।
कालसर्प दोष कितने प्रकार के होते हैं (Types Of Kaalsarp Dosh)
कालसर्प दोष मुख्य तय 12 प्रकार के होते हैं। आइए जानते हैं इनके नामों के बारे में…
1- शेषनाग कालसर्प दोष
2- अनंत कालसर्प दोष
3- कुलिक कालसर्प दोष
4- वासुकी कालसर्प दोष
5- शंखपाल कालसर्प दोष
6- पद्म कालसर्प दोष
7- महापद्म कालसर्प दोष
8- तक्षक कालसर्प दोष
9- कार्कोटक कालसर्प दोष
10- शंखचूड़ कालसर्प दोष
11- घातक कालसर्प दोष
12- विषधर कालसर्प दोष
ऐसे बनते हैं कालसर्प दोष
अनंत काल सर्पयोग का निर्माण तब होता जब कुण्डली के पहले भाव में राहु और सातवें भाव में केतु स्थित हो। इस दोष से पीड़ित जातकों को विवाह में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जीवनसाथी के साथ मतभेद रहते हैं।
कुलिक काल सर्पयोग तब बनता है जब कुंडली के दूसरे भाव में राहु स्थित हो और आठवें भाव में केतु। इस दोष से पीड़ित व्यक्तियों को सेहत संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही आकस्मिक धनहानि भी होती है।
वासुकि काल सर्पयोग तब बनता है जब कुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु स्थित हो। इस योग के बनने से व्यक्ति को भाग्य का साथ नहीं मिलता है। साथ ही व्यक्ति नास्तिक हो जाता है।
शंखपाल कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली के चौथे भाव में राहु और दशम भाव में केतु स्थित हो। इस योग के बनने से व्यक्ति को करियर और कारोबार में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पदम कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली में राहु पांचवें भाव में और केतु ग्यारहवें भाव में स्थित हो। इस कालसर्प योग के बनने से व्यक्ति को संतान प्राप्ति में बाधा का सामना करना पड़ता है। साथ ही संतान गलत मार्ग पर चलने वाली होती है।
महापदम कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली के छठे भाव में राहु और बारहवें भाव में केतु स्थित हो। इस योग के बनने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लगते हैं। साथ ही व्यक्ति को कोर्ट- कचहरी के मामलों में हार का सामना करना पड़ता है।
तक्षक कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली के सातवें भाव में राहु और पहले भाव में केतु स्थिति हो। इस स्थिति में व्यक्ति का दांपत्य जीवन खराब रहता है। साथ ही व्यक्ति की सोच नकारात्मक हो जाती है।
कर्कोटक कालसर्प योग तब बनेगा जब कुंडली में आठवें भाव में राहु और दूसरे भाव में केतु विराजमान हो। इस योग के बनने से व्यक्ति को गुप्त रोग हो सकते हैं। साथ ही व्यक्ति को कई बार आकस्मिक धनहानि हो सकती है।
शंखचूड़ कालसर्प योग तब बनता है जब राहु कुंडली के नवम भाव में और केतु तीसरे भाव में विराजमान होता है। इस योग के बनने से व्यक्ति के मन में किसी बाद को लेकर भय रहता है। साथ ही व्यक्ति को कार्यों में भाग्य का साथ नहीं मिलता है।
घातक काल सर्प योग तब बनता है जब राहु कुंडली में दसवें भाव में और केतु चौथे भाव में स्थित हो। इस स्थिति में व्यक्ति को वाहन और प्रापर्टी का सुख प्राप्त नहीं होता है। साथ ही व्यक्ति को काम- कारोबार में दिक्कत सामना करना पड़ता है।
विषधर कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली के ग्यारहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु स्थित हो। इस योग के बनने से व्यक्ति को संतान प्राप्ति में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही निवेश में हानि होती है।
शेषनाग कालसर्प योग तब होता है जब जन्म कुंडली में राहु बारहवें भाव में और केतु छठे भाव में स्थित होता है। इस योग के बनने से व्यक्ति के ऊपर झूठे आरोप लगत हैं। साथ ही व्यक्ति को कोर्ट- कचहरी का सामना करना पड़ता है।
कालसर्प दोष के लक्षण
1. व्यक्ति को जीवन में मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। साथ ही जरूरी कार्य नहीं बनते हैं।
2. कारोबार में बार-बार नुकसान का सामना करना पड़ता है।
3. बार बार अपमान सहना पड़ता है और झूठे आरोप लगते हैं।
4. संतान होने में दिक्कत होना या फिर संतान की उन्नति नहीं होना।
5. विवाह में देरी होना या दांपत्य जीवन में रहना परेशानियों का सामना करना। जीवनसाथी के साथ तनाव रहना।
6. सेहत खराब होना और बार-बार चोट-दुर्घटनाएं होना।
7. डरावने सपने बार-बार आना और नाग-नागिन बार-बार दिखना।
8. मृत व्यक्ति सपने में कुछ मांगे, जल में डूबना आदि
कालसर्प दोष के उपाय (Kaalsarp Dosh Ke Upay)
– नाग पंचमी के दिन भगवान शिव का अभिषेक करते समय उन्हें चांदी के नाग और नागिन का जोड़ा चढ़ाएं। ऐसा करने से कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
– नव नाग स्तोत्र का 108 बार पाठ करें। वहीं बुधवार के दिन अपने वजन के बराबर कोयले पानी में 7 बार बहाएं।
– नाग पंचमी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दूध रखें और बहते हुए जल में 11 नारियल प्रवाहित करें।
-काल सर्प दोष निवारण यंत्र को घर में स्थापित करके पूजा करें।
– रोज महामृत्युंजय मंत्र की 5 माला का जाप करें। ऐसा करने से कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
– जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द या कंबल का दान करें।
कालसर्प इनके लिए भाग्यशाली
वैदिक ज्योतिष अनुसार कालसर्प दोष वैसे व्यक्ति को जीवन में अशुभ फल प्रदान करता है लेकिन जन्मकुंडली में जब राहु अपनी उच्च राशि वृष या मिथुन में होता है तो ऐसे लोग राहु की दशा में खूब सफलता पा सकते हैं। कालसर्प योग वाले व्यक्ति की कुंडली में जब गुरू और चन्द्र एक दूसरे से केन्द्र में हों अथवा साथ बैठें हों तो ऐसा व्यक्ति भी निरंतर उन्नति करते हैं। ऐसे लोगों को राहु और केतु शुभ फल प्रदान करते हैं।
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