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Ramadan 2019 Fourth Roza: क्या है रमज़ान का अशरा-ए-रहम? यहां जानें रमज़ान के पहले 10 दिन की खासियत

Ramadan Mubarak 2019 Fourth Roza: रोजे के दौरान मुसलमानों को हूजुर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सुन्नतों पर अमल करना चाहिए। नफ्ल और तहज्जुद के साथ तरावीह भी पाबंदी के साथ पढ़ने की बात कही गई है।

Ramadan Mubarak 2019: तीसरे रोजे पर हम कर रहे हैं रमज़ान के पहले 10 दिन की खासियत का जिक्र।

आजाद खान

Ramadan 2019 Fourth Roza: रमज़ान का मुकद्दस महीना शुरू हो गया है। पूरी दुनिया के मुसलमान रोजे रख रहे हैं। दिन के पांच वक्त की नमाज़ के लिए मस्जिदों में भीड़ दिखने लगी है तो रात में एहसा (Ehsa) के बाद भी तरावीह (Taravih) की नमाज़ के लिए मस्जिदें गुलज़ार हो रही हैं। बुखारी शरीफ की रिवायत के अनुसार, रमज़ान के 3 हिस्से हैं। रमज़ान के पहले 10 दिन को पहला अशरा (अशरा-ए-रहम), बीच के 10 दिन को दूसरा अशरा (अशरा-ए-मगफिरत) और आखिरी के 10 दिन को तीसरा अशरा (अशरा-ए-निजात) कहा जाता है। ऐसे में रमज़ान का यह पहला अशरा चल रहा है। आइए जानते हैं कि क्या खास है इस अशरे में और कैसे इस अशरे में अल्लाह की रहमत तलब करें।

पहले 10 दिनः रमज़ान के पहले 10 दिन में अल्लाह का खूब जिक्र और बड़ाई बयान करें। रोजे के दौरान दुआ की तिलावत करें और अल्लाह से उसके रहम की तलब करें। हदिसों में आया है कि रमज़ान में एक दुआ पढ़ने से बहुत सवाब मिलते हैं।

ऐसे पूरी कर सकते हैं तिलावत: वहीं, रमज़ान में भी कुरान के तिलावत का अलग फजीलत है। हर रोज अगर पांचों वक्त की नमाज़ के बाद चार से पांच पन्ने अगर पढ़ी जाए तो रमज़ान के अंत तक कुरान की पूरी तिलावत हो जाएगी।

दूसरों पर रहम रखें बरकरार: रमज़ान में मुसलमानों को दूसरों पर दया और रहम करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह रहम उसी पर करता है, जो दूसरों पर रहम करता है। रमजानुल मुबारक में लोगों को सदका- खैरात भी ज्यादा से ज्याद करना चाहिए। अल्लाह उसी को प्यार करता है जो दूसरों को प्यार और उसकी मदद करता है।

सदका भी करना जरूरी: सदका के बारे में अल्लाह कुरान में फरमाता है कि जरूरतमंदों को सदका छुपाकर दो। इससे उनकी गुरबत और इज्जत बरकरार रहती हैं।

पड़ोसियों से रहम और नमाज़ की पाबंदीः रोजे के दौरान मुसलमानों को हूजुर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नतों पर अमल करना चाहिए। उन्होंने रमज़ान में सेहरी की फजीलत को बयान करते हुए इसे खाने को कहा है। रमज़ान में अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पड़ोसियों का भी ध्यान रखने का हुक्म मिला है। एक-दूसरे की मदद करने से लेकर सुख-दुख में भी साथ देने की सलाह दी है।

ज्यादा से ज्यादा पढ़ें नमाज़: अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इस खास महीने में ज्यादा से ज्यादा नमाज़ पढ़ने का सलाह दी। नफ्ल और तहज्जुद के साथ तरावीह भी पाबंदी के साथ पढ़ने की बात कही गई है। वहीं, नमाज़ को तनहा नहीं, बल्कि मस्जिद में जमात के साथ पढ़ने पर जोर दिया गया है, क्योंकि जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से 70 गुना सवाब मिलता है।

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