Weekly Vrat Tyohar 2 To 8 March 2026: मार्च माह का पहला सप्ताह हिंदू धर्म के लिए काफी खास होने वाला है। इस सप्ताह के आरंभ फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ हो रहा है। इसके साथ ही समापन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को समाप्त हो रहा है। इस सप्ताह साल का पहला चंद्र ग्रहण से लेकर होली, होलिका दहन, भाई दूज से लेकर रंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं द्रिक पंचांग के अनुसार, मार्च माह के पहले सप्ताह पड़ने वाले व्रत त्योहारों के बारे में…

2 मार्च 2026, सोमवार- होलिका दहन

 द्रिक पंचांग के अनुसार,  2 मार्च शाम 5:55 से फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि आरंभ हो रही है, जो 3 मार्च को शाम 5:08 बजे समाप्त होगी। भद्रकाल 2 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 28 मिनट पर लग जाएगी, जो रात 04 बजकर 56 मिनट तक समाप्त होगी। ऐसे में भद्रा का पुच्छ 2 मार्च 2026, सोमवार को रात में 11 बजकर 53 मिनट से रात्रि 01 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस दौरान होलिका दहन करना लाभकारी होगा, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है।

3 मार्च, मंगलवार- चंद्र ग्रहण, फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन

अगर आप 3 मार्च को होलिका दहन करना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा मुहूर्त तड़के 5 से 6 बजे के बीच है।

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू हो रहा है, जो शाम 06 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। ये भारत में दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से आरंभ हो जाएगा।

आज फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि है। ऐसे में आज स्नान-दान करना लाभकारी हो सकता है।

4 मार्च, बुधवार- चैत्र मास आरंभ, धुलंडी

4 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगी, जो इस पूरे माह रहने वाला है।

होलिका दहन के बाद रंगों की होली 4 मार्च को ही खेली जाएगी।

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5 मार्च, गुरुवार- होली भाई दूज

हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। होली के बाद होने के कारण इसे होली भाई दूज या फिर भ्रातृ द्वितीया के नाम से जाना जाता है। इस दिव बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाकर सुख-समृद्धि, उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की कामना करते हैं।

6 मार्च, शुक्रवार- भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने का विधान है।

8 मार्च, रविवार- रंग पंचमी

 चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रंग पंचमी के दिन देवी-देवता स्वयं धरती पर अवतरित होकर होली खेलते हैं। इसी कारण इस पर्व को देवताओं की होली कहा जाता है। कई स्थानों पर इसे देव पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।  चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 07 मार्च 2026 को शाम 7 बजकर 17 मिनट से होगी, जो 08 मार्च 2026 को रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। 

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डिसक्लेमर- पंचांग की गणना भौगोलिक स्थान के आधार पर बदल सकती है। अपने शहर के सटीक सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय के लिए स्थानीय पंचांग का संदर्भ लें। इसके साथ ही अपने पंडित से होलिका दहन, होली आदि का समय अवश्य जान लें।