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बुधवार व्रत कथा: बुधवार व्रत में ये कथा पढ़ना होता है जरूरी

बुधवार का व्रत करने से सिर्फ धन-धान्य की कमी ही नहीं दूर होती है बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Author Updated: July 24, 2019 8:44 AM
जानिए क्या है बुधवार के व्रत की कथा।

Wednesday vrat katha: हर व्यक्ति धन-धान्य की कमी से दूर रहना चाहता है। अपनी सभी समस्याओं का समाधान ईश्वर का व्रत करने से मिलता है। वहीं धन और धान्य की कमी को पूरा करने के लिए बुधवार का व्रत किया जाता है। इसलिए अगर आप भी इनकी कमी से गुजर रहे हैं तो बुधवार का व्रत करना आपके लिए लाभदायक होता है। बुधवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और पैसे की तंगी जैसी समस्याओं का अंत हो जाता है। बुधवार का व्रत करने से सिर्फ धन-धान्य की कमी ही नहीं दूर होती है बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। बुधवार के व्रत के दिन विधि के साथ व्रत करना चाहिए और बुधवार कथा का पाठ करना आवश्यक होता है। इस कथा को बुधवार के दिन जरुर सुनना और सुनाना चाहिए।

बुधवार व्रत कथा-
पौराणिक कथा के अनुसार समतापुर नगर में मधुसूदन नामक एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत धनवान था। मधुसूदन का विवाह बलरामपुर नगर की सुंदर और गुणवान कन्या संगीता के साथ हुआ। शादी के बाद वो अपनी पत्नी को लेने बुधवार के दिन पहुंच गया। इसपर कन्या के माता-पिता ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन किसी भी शुभ दिन के लिए यात्रा नहीं की जाती है। इसपर मधुसूदन ने कहा कि वो इन सब बातों पर विश्वास नहीं करता है और अपनी पत्नी को लेकर चला गया। दोनों कुछ दूर ही चले थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। वहां से दोनों ने पैदल यात्रा शुरु की, इस बीच उसकी पत्नी को प्यास लगी तो वो उसे एक पेड़ की छांव में बैठा कर पानी लेने चला गया और जब वापस लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी के पास उसकी शक्ल जैसा ही एक व्यक्ति बैठा हुआ है। संगीता भी उसी शक्ल के दो लोग देखकर हैरान हो गई। इसके बाद उन दोनों व्यक्तियों में युद्ध होने लगा कि कौन सच्चा है और कौन झूठ बोल रहा है। इस शोर से आसपास कई लोग जमा हो गए और उन्होनें सिपाही को बुलाकर उन्हें नगर के राजा के सामने प्रवेश करवाया। राजा भी उन दोनों में अंतर नहीं कर पाया और संगीता भी नहीं पहचान पा रही थी कि उसका पति कौन है।

राजा ने दोनों को ही कारावास में डाल देने की सजा सुनाई। सजा सुनकर मधुसूदन घबरा गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि उसे किन पापों की सजा मिल रही है। तभी आकाशवाणी होती है कि मधुसूदन तूने अपने सास-ससुर के कहने पर भी अपनी पत्नी को ले आया, ये उसी का नतीजा है। इसके बाद मधुसूदन माफी मांगता है कि बुधदेव मुझे माफ कर दीजिए, अब कभी किसी शुभ काम के लिए इस दिन यात्रा नहीं करुंगा और हर बुधवार को व्रत भी किया करुंगा। इस प्रार्थना के बाद बुधदेव ने उसे माफ कर दिया। उनके ये कहते ही सामने खड़ा व्यक्ति गायब हो गया। राजा और सभी लोग इसे देखकर हैरान हो गए। इसके बाद राजा ने मधुसूदन और उसकी पत्नी को सम्मान के साथ विदा किया। कुछ दूरी पर ही उन्हें बैलगाड़ी मिल गई और दोनों अपने राज्य की तरफ चल दिए। इसके बाद मधुसूदन और उसकी पत्नी हर बुधवार को विधि के साथ व्रत करने लगे और इसके बाद दोनो सुख के साथ अपना जीवनयापन करने लगे।

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