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विश्वकर्मा जयंती 2019 का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि और अन्य सभी जानकारी मिलेगी यहां

भगवान विश्वकर्मा को सृजन और निर्माण का देवता कहा गया है। इसलिए इनकी जयंती (Vishwakarma Jayanti 2019) के दिन लोग अपने उद्योगों, फैक्ट्रियों और मशीनों की पूजा करते हैं।

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सनातन धर्म में विश्वकर्मा पूजा का काफी महत्व माना जाता है। क्योंकि भगवान विश्वकर्मा को सृजन और निर्माण का देवता कहा गया है। इसलिए इनकी जयंती के दिन लोग अपने उद्योगों, फैक्ट्रियों और मशीनों की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इनकी पूजा से खूब तरक्की होती है और कारोबार में मुनाफा होता है। साथ ही प्रयोग में लाई जाने वाली मशीनें खराब नहीं होती।

विश्वकर्मा पूजा विधि (Vishwakarma Puja Vidhi) : 

इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वैवाहिक जीवन वाले अपनी पत्नी के साथ इस पूजन को करें। हाथ में फूल, चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करे। पूजा में दीप, धूप, फूल, गंध, सुपारी, रोली इत्यादि चीजों का प्रयोग करें। हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर इस मंत्र का जाप करते हुए – ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:; ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम: चारो ओर अक्षत छिड़के और पीली सरसों लेकर चारो दिशाओं को बंद कर दे। अपने आप को और अगर शादीशुदा हैं तो अपनी पत्नी को भी रक्षा सूत्र बांधे और साथ ही पुष्प जलपात्र में छोड़े। इसके बाद हृदय में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें। दीप जलाये, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करे। शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाकर उस स्थान पर सप्त धान्य रखें और उस पर मिट्टी और तांबे से जल डालें। इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश का आच्छादन करे। अब चावल से भरा पात्र समर्पित कर ऊपर विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें। भगवान विश्वकर्मा को पुष्प अर्पित करें और प्रार्थना करें कि – ‘हे विश्वकर्मा जी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए। इस प्रकार पूजन के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करना होता है।

विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Aarti In Hindi) :

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2019 (Vishwakarma Puja 2019 Muhurat) :

इस वर्ष कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का आयोजन हो रहा है। यह एक शुभ स्थिति है। संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7 बजकर 2 मिनट से है। इस समय पूजा आरंभ की जा सकती है। सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल है और शाम 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल रहेगा। इन समयों को छोड़कर दिन में कभी भी पूजा आरंभ कर सकते हैं।

भगवान विश्वकर्मा ने किया था इनका निर्माण: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल की सभी राजधानियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। जिनमें स्वर्ग लोक, रावण कि लंका, द्वारिका और हस्तिनापुर भी विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं। यहां तक कि स्वर्ग के राजा इंद्र का अस्त्र वज्र, उड़ीसा में भगवान जगन्नाथ का मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर द्वारका नगरी का निर्माण, कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशूल और यमराज का कालदण्ड भी इनके द्वारा भी निर्मित किया गया माना जाता है।

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