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Vishwakarma Jayanti 2019 Date: विश्वकर्मा जयंती कब? जानें पूजा विधि, मंत्र और इस दिन का महत्व

When Is Vishwakarma Jayanti: विश्वकर्मा जयंती 2019, 17 सितंबर को पूरे देश में मनाई जायेगी। इस दिन लोग अपने औजार, मशीनों और औद्योगिक इकाइयों की पूजा करते हैं। भगवान विश्वकर्मा को “देवताओं का शिल्पकार” माना गया है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 12, 2019 9:36 AM
विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को मनाई जायेगी, जानें इस दिन का महत्व।

विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को पूरे देश में मनाई जायेगी। इस दिन शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को “देवताओं का शिल्पकार” माना गया है। हर साल ये जयंती कन्या संक्रांति के दिन के मनाई जाती है। इस दिन हिंदू धर्म के लोग अपने कार्य स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने वाले व्यक्ति के घर पर धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती। अत: इस पूजा से व्यक्ति के व्यापार में वृद्धि होती है।

भगवान विश्वकर्मा को सृजन का देवता कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि विश्वकर्मा जी ने इन्द्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका आदि का निर्माण किया था। इसलिए प्रत्येक वर्ष विश्वकर्मा जयंती पर औजार, मशीनों और औद्योगिक इकाइयों की पूजा की जाती है। जगन्नाथ पूरी में “जगन्नाथ” मंदिर का निर्माण, पुष्पक विमान का निर्माण, सभी देवताओं के महलों का निर्माण, कर्ण का कुंडल, विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शंकर का त्रिशूल आदि का भी निर्माण विश्वकर्मा के द्वारा ही किया हुआ माना जाता है।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि – विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर तैयार हो जाएं। पूजा स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की फोटो या मूर्ति स्थापित करें। पीले या फिर सफेद फूलों की माला भगवान विश्वकर्मा को पहनाएं। उनके समक्ष सुगंधित धूप और दीपक भी जलाएं। अब अपने सभी औजारों की एक-एक करके पूजा करें। भगवान विश्वकर्मा को पंचमेवा प्रसाद का भोग लगाएं। इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें।

पूजा के समय इन मंत्रों का उच्चारण करें:
।। ऊँ आधार शक्तपे नम: ।।
।। ऊँ कूमयि नम: ।।
।। ऊँ अनन्तम नम: ।।
।। ऊँ पृथिव्यै नम: ।।
।। ऊँ मंत्र का जप करे ।
जप के लिए रुद्राक्ष की माला होनी चाहिए। जप शुरू करने से पहले ग्यारह सौ, इक्कीस सौ, इक्यावन सौ या ग्यारह हजार जप करने का संकल्प लें। ये आप पर निर्भर करता है कि आप कितनी बार जप करना चाहते हैं। आप चाहे तो किसी पुरोहित से भी जप संपन्न करा सकते हैं।

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