आज दिव्य धाम की सीरीज में आज बात करने जा रहे हैं विष्णुपद मंदिर के बारे में, जो बिहार प्रदेश के गया जिले में पड़ता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां स्थित पवित्र पदचिह्न (फुटप्रिंट) को भगवान विष्णु के चरणों का प्रतीक माना जाता है। यह स्थल खासतौर पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहीं भगवान विष्णु ने राक्षस गयासुर का वध किया था, जिससे इस स्थान का नाम ‘गया’ पड़ा। आइए जानते हैं इतिहास और महत्व…
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विष्णुपद मंदिर का इतिहास
विष्णुपद मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन माना जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था, जो मराठा साम्राज्य की एक महान रानी थीं। आपको बता दें किमंदिर में स्थित 40 सेमी लंबा पदचिह्न पत्थर में उकेरा गया है, जिसे भगवान विष्णु के चरणों का निशान माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर राक्षस गयासुर का वध किया था और उसके शरीर को दबाने के लिए यहां अपना चरण रखा था।
मंदिर का महत्व
विष्णुपद मंदिर का महत्व मुख्य रूप से पितरों के श्राद्ध और मोक्ष प्राप्ति से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर के पास बहने वाली फल्गु नदी भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानी जाती है। आपको बता दें कि विशेष रूप से पितृपक्ष मेला के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने आते हैं।
विष्णुपद मंदिर कैसे पहुंचे
अगर आप हवाईजहाज से आ रहे हैं तो गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से लगभग 10 किमी दूर स्थित है। वहीं अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं तो गया जंक्शन भी मंदिर से काफी पास है। गया जंक्शन देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। वहीं अगर सड़क मार्ग की बात करें तो गया, पटना और आसपास के शहरों से बस और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। जिनके द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
