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Vishnu Kani 2017: कैसे मनाया जाता है ये त्योहार, क्या है इसके पीछे की कहानी?

Vishnu 2017 Wishes: केरल में कहा जाता है कि जब सूर्य अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो राशि चक्र में बदलाव आता है और नए साल की शुरुआत होती है।

विशू मनाती एक महिला। ( Photo Source: PTI)

केरल में मलयालम महीने मेडम के दिन विशु त्योहार मनाया जाता है। केरल के लोग इस त्योहार को नए साल के के तौर पर मनाते हैं। यह केरल के बैसाखी, असम के बिहू और बंगाल को पोइला बोइशा की तरह होता है। विशु के जरिए मलयाली लोग ज्योतिषी नए साल का स्वागत करते हैं। पंजाब में इस त्योहार के बाद ही गेंहू की फसल की कटाई शुरू की जाती है। देशभर में इस त्योहार को खरीफ की फसल पकने की खुशी के रूप में मनाया जाता है। केरल में कहा जाता है कि जब सूर्य अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो राशि चक्र में बदलाव आता है और नए साल की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस समय सूर्य भूमध्य रेखा से ऊपर होता है। यह त्योहार केरल में ठीक उसी समय मनाया जाता है जब पंजाब में वैशाखी।

इस त्योहार के बारे में माना जाता है कि 844 ईस्वी में जब स्टनु रवि के शासनकाल था तो जब से इसे मनाया जाता है। मान्यता है कि इस समय सूर्य बिलकुल सीधा पूर्व से विष्णु(विशु) पर पड़ता है। इस समय भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु को समय का ईश्वर माना जाता है और चूंकि विष्णु खगोलीय वर्ष के पहले दिन को चिह्नित करता है जिस कारण लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन के बारे में कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने नरकासुरा को मारा था। यह एक कारण है कि माता- पिता अपने बच्चों को कृष्ण की तरह कपड़े पहनाते है और घरों में श्री कृष्ण की मूर्तियों को रखते हैं।

इस दिन के बारे में एक ओर कहावत है कि इस दिन भगवान राम ने रावण को मारा था। इसके बाद सूर्य की पूर्व की ओर बढ़ने की हिम्मत हुई। जिस कारण से इस त्योहार को पूर्व में मनाया जाता है।

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