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विनायक चतुर्थी 2017 व्रत कथा: जानिए क्यों की जाती है भगवान गणेश की सबसे पहले पूजा

भगवान गणेश को बुद्धि का देवता कहा जाता है, और इनके साथ माता सरस्वती को पूजा जाता है।

हर एक देवता की पूजा से पहले भगवान गणेश का पूजन होता है।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का पूजन करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं इसलिए ही इन्हें संकटमोचन और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है। इन्हें सभी देवताओं से पहले पूजा जाता है। हर एक देवता की पूजा से पहले भगवान गणेश का पूजन होता है। लेकिन यह बहुत ही कम लोगों को जानकारी होगी कि भगवान गणेश की पूजा समस्त देवगणों से पहले क्यों की जाती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिससे आज गणेश चतुर्थी के दिन हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।

पौराणिक कथा के मुताबिक सभी देवताओं में एक विवाद पैदा हो गया था कि धरती पर सबसे पहले किस देवता की पूजा होनी चाहिए। इसके बाद सभी देवता अपने आपको सबसे ऊपर बताने लगे। जब मामला सुलझता हुआ नजर नहीं आया तो देवतागण इकट्ठा हुए और भगवान शिव के पास पहुंच गए। भगवान शिव ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया। भगवान शिव ने कहा कि जो भी देवता पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर मेरे पास सबसे पहले आएगा, वहीं धरती पर सब देवताओं से पहले पूजा जाएगा। इसके बाद सभी देवता अपने-अपने वाहन लेकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल गए।

भगवान गणेश ने भी इसमें हिस्सा लिया था। गणेश उन देवताओं के साथ नहीं निकले, बल्कि उसने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) के चक्कर लगाकर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर जब सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे तो उन्होंने श्री गणेश को विजेता घोषित कर दिया। इसके बाद सभी देवता शिव का यह फैसला सुनकर हैरान हो गए। तब भगवान शिव ने उन्हें बताया कि माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड में सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव के फैसले से सहमत हो गए। तभी से भगवान गणेश को समस्त देवगणों से पहले पूजे जाने लगा। भगवान गणेश को बुद्धि का देवता भी कहा जाता है। इनकी पूजा माता सरस्वती के साथ की जाती है।

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