हिंदू पंचांग में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। जब यह चतुर्थी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आती है, तब इसे विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन भगवान श्रीगणेश की उपासना, व्रत और चंद्र दर्शन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। साथ ही सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अधिक मास में पड़ने के कारण इस संकष्टी चतुर्थी का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है और भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इस साल विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून को रखा जाएगा। वहीं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

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विभुवन संकष्टी चतुर्थी तिथि

फ्यूचर पंचांग के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को रात 9 बजकर 22 मिनट से आरंभ होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 4 जून, गुरुवार को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून को रखा जाएगा।

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विभुवन संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

इस साल विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:28 बजे से लेकर 11:46 बजे तक रहेगा। इस योग में गणेश भगवान की पूजा- अर्चना कर सकते हैं। वहीं व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 5:23 बजे से 8:51 बजे तक गणेश जी की पूजा कर सकते हैं। इस दौरान लाभ-उन्नति और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त का विशेष संयोग रहेगा।

चंद्रोदय और अर्घ्य का समय

पंचांग के अनुसार 3 जून को चंद्रोदय रात 10 बजकर 04 मिनट पर होगा। श्रद्धालु रात 10:04 बजे से 10:43 बजे के बीच चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं।

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विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, गणेश मंत्रों का जप करने तथा रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से सभी प्रकार के कष्ट, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस मास में किए गए व्रत, दान और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें सुख-शांति, यश, सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।