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वेद और विश्वशांति

वैदिक ज्ञान विज्ञान हमें विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करना सिखाता है।

वेद और विश्वशांति
सांकेतिक फोटो।

रमेश पोखरियाल निशंक

संपूर्ण विश्व में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां उभर कर आई हैं। कोविड-19 की महामारी, धार्मिक उन्माद, लालच, फरेब, युद्ध की विभीषिका, विचारों के लिए संघर्ष, अविश्वास, राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबद्धता के लिए लोग एक दूसरे से मनमुटाव, लड़ाई, झगड़ा करने पर आमादा है। इसके अतिरिक्त अन्य कारणों से सम्पूर्ण विश्व में तनाव, मानसिक अशांति, अवसाद व्याप्त है।

लिहाजा, ऐसा कोई तरीका हो जिससे लोगों में अत्यधिक शांति हो, खुशी, समृद्धि , आपसी प्रेम, सुरक्षा की भावना, एक दूसरे पर अधिक विश्वास, सौहार्द की भावना और एक समरसता का माहौल बने। पर्याप्त भोजन हो , सबके पास सर के ऊपर छत हो, कपडे हों और जीवन की जरूरतें पूरी करने हेतु पर्याप्त संसाधन हों ।

प्रश्न यह उठता है कि ऐसा कैसे हो सकता है? एक आध्यात्मिक पुनर्जागरण द्वारा , वैदिक जीवन दर्शन को जीवन में अपनाकर, मानवतावादी मूल्यों को अंगीकार कर युग परिवर्तन की दिशा में बढ़ सकते हैं और इस महत्त्वपूर्ण कार्य का नेतृत्व भारत सफलतापूर्वक कर सकता है।

वैदिक ज्ञान विज्ञान हमें विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करना सिखाता है और स्पष्ट करता है कि कैसे हम सकारात्मक परिवर्तन का सूत्रपात कर सकते हैं? विषम परिस्थितियों में भारतीय परंपरागत ज्ञान परंपरा और अजर अमर संस्कृति की शरण में जाना होगा। मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन जीकर और दूसरों को इसके लिए प्रेरित कर हम न केवल अपने जीवन में बल्कि दूसरों के जोवन में भी अपेक्षित परिवर्तन ला सकते हैं। यह सब साधना द्वारा, वेद, उपनिषदों, ऋचाओं के ज्ञान से प्राप्त हो सकता है। वेद उपनिषद अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न उठता है कि वेद की रचना किसने की? इसका स्रोत क्या है? इसकी आवश्यकता क्या है? इसका स्रोत परमपिता परमेश्वर को बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि ऋषि ध्वनि के माध्यम से भगवान की आवाज सुनने में सक्षम थे और इस प्रकार वे अपने ज्ञान को बढ़ाते थे। उन्होंने यह ज्ञान अपने शिष्यों को दिया। इस प्रकार, शाश्वत सत्य जो सर्वोच्च शक्ति से निकला और बाद में ऋ षियों द्वारा ग्रहण गया, उसे वेद कहा जाता है। जीवन के रहस्यों, निरपेक्ष और परम सत्य के उत्तरों की जिज्ञासा वाले किसी भी जिज्ञासु साधक के लिए वेद का ज्ञान विज्ञान आवश्यक है। उन्हें श्रुति कहा जाता है क्योंकि ऋ षियों ने उन्हें सर्वोच्च शक्ति से सुना और उन्हें उन शब्दों के माध्यम से प्रसारित किया जिसे उनके शिष्यों ने सम्पूर्ण दुनिया में फैलाया ।

किसी के जीवन से सर्वश्रेष्ठ कैसे बनाएं, उनकी की इच्छाओं को कैसे पूरा करें, सुख, शांति और समृद्धि का संचार कैसे हो? कैसे लोगों और राष्ट्रों के बीच शांति और सद्भाव पैदा करें? समाधान एक सरल अंतर्निहित प्रतिमान आधारितशुद्ध चेतना में मिलता है। चेतना के अंतहीन महासागर से सब उत्तर मिलेंगे। यह सम्पूर्ण जानकारी वेद के माध्यम से प्राप्त होती है। वेद सत्य, धर्म, परोपकार, तपस्या, करुणा, प्यार, परोपकार, मानवीय मूल्य, अहिंसा को आधार मानकर सम्पूर्ण विश्व के कल्याण हेतु जीवन के रहस्यों, निरपेक्ष और परम सत्य के उत्तरों की जिज्ञासा वाले किसी भी जिज्ञासु साधक के लिए आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

वेदों को समझना आसान नहीं है लेकिन उपनिषदों के माध्यम से समझा जा सकता है। भगवदगीता सभी उपनिषदों की सर्वोत्कृष्टता का आसवन है। इतिहास और पुराणों में वेदों का सार निकालने के लिए ऋ षियों द्वारा कहानियों और ऐतिहासिक घटनाओं का उपयोग किया गया है। वेद , उपनिषद एवं अन्य ऋ चाएं मार्गदर्शन कर मनुष्य जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने में मदद करती हैं।

वेद एवं विश्वशांति अभियान की शुरुआत कैसे हुई ? किस प्रकार यह अभियान आज एक अंतरराष्ट्रीय अभियान बन गया? वर्ष 2019 में यूनिसेफ के वैश्विक सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व करने पेरिस गया था। पेरिस में भारतीय संस्कृति, कला से जुड़े लोगों से मुलाकात का कार्यक्रम था और इस दौरान महेश योगी के उत्तराधिकारी डा टोनी नादर मिलने आए। 2019 में पेरिस में डा टोनी नादर, एमडी, पीएचडी से अत्यंत सार्थक मुलाकात हुई।

डा नादर विश्व के प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाजी (तंत्रिका विज्ञान में पीएचडी) में प्रशिक्षित एक चिकित्सा चिकित्सक और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त वैदिक विद्वान हैं। डा नादर 100 से अधिक देशों में अंतरराष्ट्रीय ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन संगठनों के प्रमुख हैं। अमेरिका से लेकर एशिया तक, यूरोप से अफ्रीका तक, डा नादर भावातीत ध्यान ‘‘ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन’’ कार्यक्रम और इसकी उन्नत प्रथाओं और राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में इस तकनीक के व्यावहारिक अनुप्रयोगों- शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय, रक्षा, कृषि, और बहुत कुछ का मार्गदर्शन करते हैं।

डा नादर ने बताया कि उनका लक्ष्य पूरे विश्व परिवार के मन और दिल में खुशी, स्वास्थ्य और शांति लाना है। एक शिक्षक, पिता, नेता, वैज्ञानिक और तंत्रिका विज्ञान विशेषज्ञ के रूप में उनके अनुभवों का लाभ वैश्विक नागरिकों को मिले। जीवन में महत्त्वपूर्ण चीजों के प्रति उनकी जागरूकता को वास्तव में गहन दृष्टिकोण से खोलने की उनकी प्रतिबद्धता को प्रेरित किया है।

बातचीत में इन मुद्दों पर चर्चा हुई। पृथ्वी पर यहां क्यों आए हैं? हमारा उद्देश्य क्या है? पृथ्वी पर अपने छोटे जीवनकाल का क्या करना चाहिए? यह दुनिया कैसे बनी? लोग क्यों संघर्ष करते हैं, बीमारी से क्यों पीड़ित होते हैं, और संसार में सब खुश क्यों नहीं हैं? अभाव, कष्ट आखिर क्यों हैं? क्या ऐसा ही होना चाहिए कि सब को अपनी आवश्यकतानुसार सब कुछ मिल सके?

सबसे प्रसन्नता का विषय यह हैं कि वैदिक शिक्षा शोध में देश विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की रूचि जागी है। प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से दुनिया की 100 से अधिक संस्थाएं इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में कार्यरत हैं। विश्वास है कि परंपरागत शाश्वत ज्ञान भारत को न केवल ज्ञान आधारित महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा बल्कि समूचे विश्व में सुख, शांति और समृद्धि के नव युग का सूत्रपात करेगा।
(लेखक सांसद हैं)

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First published on: 28-09-2022 at 04:05:00 am