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Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत कथा यहां देखें

Vat Savitri Vrat katha: सावित्री ने अपने पतिव्रता व्रत के प्रभाव से न केवल अपने पति को पुन: जीवित करवाया बल्कि सास को नेत्र ज्योति प्रदान करते हुए ससुर को उनके ससुर को खोया राज्य फिर दिलवाया।

पौराणिक एवं प्रचलित वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री।

Vat Savitri Katha: वट सावित्री व्रत उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है। इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। ये व्रत सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का वरदान देता है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रताप से पति की आयु लंबी होती है। इस व्रत को शादीशुदा महिलाओं के साथ कुंवारी लड़कियां भी करती हैं। जानिए वट सावित्री व्रत की पावन कथा…

पौराणिक एवं प्रचलित वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति रूप में चुना था। लेकिन जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं तो भी सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला। वह समस्त राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगीं।

सत्यवान लकड़ियां काटने जंगल गए। वहां वह मूर्छित होकर गिर पड़े। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति का सिर रख उसे लेटा दिया। उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। यमराज सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर जा रहे हैं। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल देती हैं। यह भी पढ़ें- Surya Grahan 2021 Today Live Updates: सूर्य ग्रहण कितने बजे से होगा शुरू, कहां और कैसे देखें लाइव जानिए पूरी डिटेल

उन्हें आता देख यमराज ने कहा कि- हे पतिव्रता नारी! पृथ्वी तक ही पत्नी अपने पति का साथ देती है। तुम वापस लौट जाओ। सावित्री ने कहा- जहां मेरे पति रहेंगे वहीं मुझे भी रहना है। यही मेरा पत्नी धर्म है। यमराज के कई बार मना करने पर भी वह नहीं मानीं, अंत में सावित्री के साहस और त्याग से यमराज ने प्रसन्न होकर उनसे तीन वरदान मांगने को कहा।

तब सावित्री ने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति मांगी, ससुर का खोया हुआ राज्य मांगा एवं अपने पति सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनने का वर भी मांगा। तीनों वरदान सुनने के बाद यमराज ने कहा- तथास्तु! ऐसा ही होगा। यमराज आगे बढ़ने लगे। सावित्री ने कहा कि है प्रभु मैं एक पतिव्रता पत्नी हूं और आपने मुझे पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया है। यह सुनकर यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। सावित्री उसी वट वृक्ष के पास आ गईं जहां उसके पति का मृत शरीर पड़ा था। सत्यवान जीवित हो गए। यह भी पढ़ें- Surya Grahan 2021 Horoscope: सूर्य ग्रहण के प्रभाव से 5 राशियों के जीवन में होंगे बड़े बदलाव, जानिए अपनी राशि का हाल

इस प्रकार सावित्री ने अपने पतिव्रता व्रत के प्रभाव से न केवल अपने पति को पुन: जीवित करवाया बल्कि सास को नेत्र ज्योति प्रदान करते हुए ससुर को उनके ससुर को खोया राज्य फिर दिलवाया। तभी से वट सावित्री व्रत पर वट वृक्ष का पूजन-अर्चन करने का विधान है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सौभाग्यवती महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती हैं और उनका सौभाग्य अखंड रहता है। यह भी पढ़ें- वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, सामग्री लिस्ट और कथा यहां देखें

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