Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, उत्तम भविष्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखने के साथ बरगद के पेड़ का विधिवत पूजा करने के बाद ही काले चने और वट वृक्ष की एक कोपल खाकर अपना व्रत खोलती हैं। इस साल वट सावित्री व्रत में काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। माना जाता है कि बरगद के पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु जी और शाखाओं में शिव जी निवास करते हैं। इसे अमरत्व और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं सावित्री के पति सत्यवान इसी वृक्ष के नीचे मरे थे और इसी स्थान में जीवित हुए थे। इसी के कारण वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती…

वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त (Vat Savitri Vrat 2026 Shubh Muhurat)

ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 17 मई को अर्धरात्रि में 1 बजकर 30 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार के दिन ही रखा जाएगा।

वट सावित्री व्रत 2026 पूजा समय (Vat Savitri Vrat 2026 Puja Muhurat)

वट सावित्री व्रत पर पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा की जाती है, जो सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक है।

वट सावित्री व्रत 2026 शुभ संयोग (Vat Savitri Vrat 2026 Shubh Sanyog)

इस साल वट सावित्री व्रत पर काफी शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन शोभन योग के साथ शनि जयंती, शनिश्चरी अमावस्या, गजलक्ष्मी, विपरीत राजयोग, बुधादित्य राजयोग से लेकर मासिक कार्तिगाई तक पड़ रहा है।

वट सावित्री 2026 पूजा विधि (Vat Savitri Vrat 2026 Puja Vidhi)

  • वट सावित्री के दिन सूर्योदय से पहले उठकर घर के सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें और साफ, शुद्ध वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद शिव-पार्वती के साथ अन्य देवी-देवता की पूजा करने के साथ सूर्य को अर्घ्य दें।
  • अब पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले छापा के लिए भिगोए हुए चावल में हल्दी डालकर पीस कर गाढ़ा पेस्ट बना लें।
  • पूजा के लिए 14 छोटी-छोटी पूड़ी और आटा-गुड़ के गुलगुले तैयार कर लें। इसके साथ ही भिगोए हुए काले चने भी निकाल लें।
  • फिर पूजा की थाली तैयार करें और स्वयं लाल, पीली, नारंगी आदि रंग के वस्त्र पहनने के साथ सोलह श्रृंगार करके तैयार हो जाएं।
  • अगर आपके आसपास बरगद का पेड़ नहीं है, तो घर पर ही एक कपड़े में बरगद की डाल को लगाकर पूजा कर सकते हैं।
  • अब पूजा आरंभ करें। सबसे पहले बरगद के नीचे मां पार्वती और मां सावित्री की तस्वीर रखें।
  • अगर तस्वीर नहीं है, तो सावित्री और माता पार्वती की प्रतीक के रूप 2 सुपारी में कलावा लपेट कर रख लें।
  • इसके बाद हल्दी वाले चावल के लेप को हथेलियों में लगाकर सात बार बरगद में छापा लगाएं।
  • फिर वृक्ष में जल चढ़ाने के साथ फूल, माला, सिंदूर, अक्षत, मिठाई आदि चढ़ाने के साथ मां पार्वती और सावित्री माता की पूजा करने के साथ सोलह श्रृंगार चढ़ाएं।
  • इसके बाद 14 पूड़ियां लें और हर एक पूड़ी में 2 भिगोए हुए चने रख दें। इसके बाद खरबूज, खीरा, आम या अन्य फल चढ़ाने के साथ जल से आचमन कर लें।
  • फिर बांस का पंखा रख दें। अब घी का दीपक और धूप, अगरबत्ती जला लें।
  • दीपक जलाने के बाद मन को शुद्ध करके अपनी कामना कहते हुए सफेद सूत का धागा या फिर सफेद नार्मल धागा, कलावा ले लें। इसके बाद इसे वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए 5 या फिर 7 बार बांध दें। जो धागा बच गया है उसे तोड़े नहीं बल्कि वहीं छोड़ दें।
  • हर बार परिक्रमा करते हुए इस मंत्र को बोले- यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वाणि वीनश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।
  • परिक्रमा करने के बाद हाथों में चना लेकर वट सावित्री व्रत कथा (Vat Savitri Vrat Katha) पढ़ें या फिर सुन लें।
  • कथा समाप्त होने के बाद चने वृक्ष में चढ़ा दें।
  • कथा सुनने के बाद सुहागिन महिलाएं माता पार्वती और सावित्री को चढ़ाए गए सिंदूर को तीन बार लेकर अपनी मांग में लगा लें। अंत में आरती करके भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
  • पूरी पूजा करने के बाद व्रत खोलने के लिए बरगद के वृक्ष की एक कोपल और 7 चना लेकर पानी के साथ निगल लें।
  • विधिवत पूजा करने के साथ घर आएं और मुख्य द्वार में चावल-हल्दी वाले पेस्ट से हाथों का थापा लगाने के साथ सिंदूर आदि लगाएं।

वट सावित्री पूर्णिमा व्रत में इस मंत्र का करें जाप (Vat Savitri Vrat 2026 Mantra)

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।

वट सावित्री व्रत की आरती (Vat Savitri Vrat Aarti Lyrics)

अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।
अल्पायुषी स त्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।
आणखी वर वरी बाळे।।मनी निश्चय जो केला।।
आरती वडराजा।।
दयावंत यमदूजा। सत्यवंत ही सावित्री।
भावे करीन मी पूजा। आरती वडराजा ।।
ज्येष्ठमास त्रयोदशी। करिती पूजन वडाशी ।।
त्रिरात व्रत करूनीया। जिंकी तू सत्यवंताशी।
आरती वडराजा ।।
स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।
धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला।
येश्र गे पतिव्रते। पती नेई गे आपुला।।
आरती वडराजा ।।
जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती।
चारी वर देऊनिया। दयावंता द्यावा पती।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।।
तुझे व्रत आचरती। तुझी भुवने पावती।।
आरती वडराजा ।।
पतिव्रते तुझी स्तुती। त्रिभुवनी ज्या करिती।।
स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया। आणिलासी आपुला पती।।
अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।।

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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।