वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है, जिसे विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री तथा सत्यवान की कथा सुनती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है।
09 या 10 मई कब है कालाष्टमी व्रत, जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
वट सावित्री व्रत कब है (Kab Hai vat savitri vrat)
फ्यूचर पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 16 मई, शनिवार को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर लगेगी और रात में 1 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। यानी 16 मई को ही वट सावित्री का व्रत किया जाएगा।
वट सावित्री व्रत पूजा मुहूर्त
शनिवार के दिन अमावस्या तिथि होने से वट सावित्री व्रत पर शनि अमावस्या का भी संयोग बन गया है। इस दिन पूजा के लिए शुभ समय अभिजीत मुहूर्त का रहेगा। सुहागिन महिलाएं 16 मई को सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकती हैं।
धार्मिक महत्व
वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है। कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने तप, निष्ठा और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वट वृक्ष को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि इसे त्रिदेव, ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। इस व्रत के पालन से न केवल दांपत्य जीवन मजबूत होता है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि का भी बने रहने की मान्यता है।
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