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Vat Savitri Puja 2021: वट सावित्री व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, सामग्री, मुहूर्त सबकुछ यहां जानिए

Vat Savitri 2021, Puja Vidhi, Vrat Katha, Samagri: इस व्रत को उत्तर भारत के कई इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में भी मनाया जाता है। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों में इसके 15 दिन बाद यानी ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत रखा जाता है।

Vat Savitri Puja Vidhi, And Vrat katha: कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था।

Vat Savitri Vrat Katha, Puja Vidhi, Samagri, Muhurat: पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत 10 जून को है। हर साल ये व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन आता है। कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था। इस व्रत वाले दिन वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री-सत्यवान की कथा को याद किया जाता है। जानिए व्रत सावित्री व्रत की पूजा विधि, कथा, महत्व और मुहूर्त…

वट सावित्री व्रत कहां मनाते हैं? इस व्रत को उत्तर भारत के कई इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में भी मनाया जाता है। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों में इसके 15 दिन बाद यानी ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत रखा जाता है।

वट सावित्री व्रत की सामग्री लिस्ट: बांस का पंखा, धूप-दीप, घी-बाती, लाल और पीले रंग का कलावा या सूत, पुष्प, फल, सुहाग का सामान, कुमकुम या रोली, लाल रंग का वस्त्र पूजा में बिछाने के लिए, पूरियां, पूजा के लिए सिन्दूर, गुलगुले, चना, बरगद का फल, कलश जल भरा हुआ। वट वृक्ष की पूजा के बाद वट सावित्री व्रत की इस कथा को पढ़ना न भूलें

पूजा की विधि: इस दिन शादीशुदा महिलाएं सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद लाल या पीली रंग की साड़ी पहनकर तैयार हो जाएं। इसके बाद पूजा का सारा सामान एक जगह रख लें। वट (बरगद) के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से साफ कर वहां सावित्री-सत्यवान की मूर्ति स्थापित कर दें। इसके बाद बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाएं। इसके बाद पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाएं। फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन या सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में काला चना लेकर इस व्रत की कथा सुनें। कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने का बायना निकाले और उसपर कुछ रूपए रखकर अपनी सास को दें। जिन स्त्रियों की सास उनके साथ नहीं रहती हैं वे बायना उन्हें भेज दें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। पूजा समापन के पश्चात ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि दान करें। यह भी पढ़ें- शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से पीड़ित जातकों के लिए आज खास दिन, इन उपायों से करें शनि देव को प्रसन्न

वट सावित्री व्रत का मुहूर्त और महत्व: अमावस्या तिथि का प्रारम्भ 9 जून को दोपहर 01:57 बजे से हो जाएगा और इसकी समाप्ति 10 जून 2021 को शाम 04:22 बजे पर होगी। इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा होती है। हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर वापस ले आई थीं। इसलिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्रत का पारण 11 जून 2021 को किया जाएगा। यह भी पढ़ें- Surya Grahan 2021 Today Live Updates: सूर्य ग्रहण कितने बजे से होगा शुरू, कहां और कैसे देखें लाइव जानिए पूरी डिटेल

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Highlights

    10:59 (IST)10 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत आरती (Vat Savitri Vrat Aarti):

    अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।

    अल्पायुषी सत्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।आणखी वर वरी बाळे।। मनी निश्चय जो केला।।आरती वडराजा।।1।।

    दयावंत यमदूजा। सत्यवंत ही सावित्री।भावे करीन मी पूजा। आरती वडराजा ।।धृ।।ज्येष्ठमास त्रयोदशी। करिती पूजन वडाशी ।।त्रिरात व्रत करूनीया। जिंकी तू सत्यवंताशी।आरती वडराजा ।।2।।

    स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला।येश्र गे पतिव्रते। पती नेई गे आपुला।।आरती वडराजा ।।3।।

    जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती। चारी वर देऊनिया।दयावंता द्यावा पती।आरती वडराजा ।।4।।

    पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।।तुझे व्रत आचरती। तुझी भुवने पावती।।आरती वडराजा ।।5।।

    पतिव्रते तुझी स्तुती। त्रिभुवनी ज्या करिती।। स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया।आणिलासी आपुला पती।। अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।।आरती वडराजा ।।6।।

    10:00 (IST)10 Jun 2021
    कोरोना काल में कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा, जानिए

    पति की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला यह व्रत आज गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस समय देश में कोरोना की दूसरी लहर भी चल रही है। ऐसे में अगर बहुत से लोग वट वृक्ष के पास जमा हो जाएंगे तो इससे भीड़ होने के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हो सकता है।ऐसी स्थिति में वट वृक्ष की एक टहनी घर में लाकर गमले या भूमि में स्थापित करें, उसकी भी पूजा व परिक्रमा का फल वृक्ष की पूजा के बराबर ही मिलता है. 

    09:16 (IST)10 Jun 2021
    Vat Samagri Vrat Puja Thali Samagri: वट सावित्री व्रत की पूजा थाली की सामग्री

    चावल (अक्षत)श्रृंगार का सामानआम, लीची, मौसमी फलमिठाई या घर में पका कोई भी मिष्ठान, बतासामौलीरोलीकच्चा धागालाल कपड़ानारियलइत्रपानसिंदूरदूर्बा घाससुपारीपंखा (हाथ का पंखा)जल

    08:53 (IST)10 Jun 2021
    कब और क्यों मनाया जाता है ये व्रत?

    इस व्रत को ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अपने मृत पति को पुन: जीवित करने के लिए सावित्री ने यमराज से याचना की थी जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें उनके पति सत्यवान के प्राण लौटा दिए थे। इसी के साथ यमराज ने सावित्री को तीन वरदान भी दिए थे। इन्हीं वरदान को मांगते हुए सावित्री ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर अपने पति को जीवित करवा दिया था। बताया जाता है कि यम देवता ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में वापस लौटाए थे। सावित्री ने इस चने को ही अपने पति के मुंह में रख दिया था जिससे सत्यवान फिर से जीवित हो उठे थे। यही वजह है कि इस दिन चने का विशेष महत्व माना गया है।

    08:26 (IST)10 Jun 2021
    Vat Savitri Vrat 2021: इस दिन क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा

    वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में बरगद का वृक्ष पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा शुभ मानी जाती है। 

    07:57 (IST)10 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत की पावन कथा

    पौराणिक एवं प्रचलित वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति रूप में चुना था। लेकिन जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं तो भी सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला। वह समस्त राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगीं। वट सावित्री व्रत की पूरी कथा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    04:23 (IST)10 Jun 2021
    वट पूर्णिमा व्रत विधि

    सुबह प्रातः जल्दी उठें और स्नान करें। स्नान के बाद व्रत करने का संकल्प लें। शृंगार करें। इस दिन पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। बरगद के पेड़ सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के वृक्ष में जल चढ़ाएं। वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगें। वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में काले चना लेकर इस व्रत का कथा सुनें। कथा सुनने के बाद पंडित जी को दान देना न भूलें। दान में आप वस्त्र, पैसे और चने दें। अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें। 

    03:36 (IST)10 Jun 2021
    पूजा सामाग्री

    सावित्री-सत्यवान की प्रतिमाएं, बांस का पंखा, लाल कलावा (मौली) या सूत, धूप-दीप, घी-बाती, पुष्प, फल, कुमकुम या रोली, सुहाग का सामान, पूरियां, गुलगुले, चना, बरगद का फल, कलश जल भरा हुआ।

    02:56 (IST)10 Jun 2021
    जानें वट सावित्री व्रत की महानता

    अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिए वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस साल 10 जून गुरुवार को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। हिन्दू धर्म में इस व्रत का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। इसलिए वट सावित्री व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। विवाहित महिलाएं इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखती हैं।

    21:11 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत का महत्व

    ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को सुहागिनें पति की लंबी आयु की कामना के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। महिलाएं वट को कलावा बांधते हुए वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। 

    20:42 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष की पूजा का क्या है महत्व

    पुराणों में जिन वृक्षों को फलदायी कहा गया है, उनमें वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ भी शामिल है। वट सावित्री पर इस पेड़ को पूजने के पीछे पति की लंबी आयु की कामना निहित है। महिलाएं इस पेड़ का पूजन कर ये कामना करती हैं कि जिस तरह से इस बरगद के पेड़ की लंबी उम्र है।

    19:53 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री का पावन व्रत... अपने प्रियवर को इस संदेश से दें वट सावित्री व्रत की बधाई

    वट सावित्री का पावन व्रत

    आपके लिए मैंने किया है

    क्योंकि आप ही के प्रेम और

    सम्मान ने जीवन को नया रंग दिया है

    वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं...

    18:30 (IST)09 Jun 2021
    Vat Savitri Vrat 2021: प्यार पति का, दुआएं सबकी...इन संदेशों से दें अपनों को त्यौहार की बधाई

    आर्शीवाद बड़ों का,प्यार पति का,दुआएं सबकी,करुणा मां की,वट सावित्री की हार्दिक शुभकामनाएं।

    15:26 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत में बांस के पंखे का है विशेष महत्व, जानें

    जो महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं उनके पूजन सामग्री में बांस का पंखा होना अति शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान वट वृक्ष को फूल-फल आदि अर्पित करने के बाद वृक्ष को बांस के पंखे से हवा दी जाती है। इससे व्रत का उद्देश्य पूरा होने की मान्यता है।

    14:32 (IST)09 Jun 2021
    पति की लंबी आयु के अलावा इस कारण भी किया जाता है वट सावित्री व्रत; जानें

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही यह पर्व संतान के सुख के लिए भी किया जाता है। मान्यता है कि इससे संतान के उज्जवल भविष्य की संभावना बढ़ती है।

    13:19 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत में पीले सिन्दूर की है विशेष मान्यता

    जो सुहागिनें वट सावित्री व्रत करती हैं उनके लिए पीला सिन्दूर लगाना अति शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पति की आयु लंबी होती है।

    12:20 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत के दिन बन रहा खास संयोग

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र को सौभाग्य व वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। इस दिन वृषभ राशि में चतुर्ग्रही योग बनना बेहद खास माना जा रहा है। चार ग्रहों के एक राशि में होने पर चतुर्ग्रही योग बनता है। मान्यता है कि इस योग से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    11:27 (IST)09 Jun 2021
    वट सावित्री व्रत के दिन क्या करें (Vat Savitri Significance):

    ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को सुहागिनें पति की लंबी आयु की कामना के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। महिलाएं वट को कलावा बांधते हुए वृक्ष की परिक्रमा करती हैं।

    11:04 (IST)09 Jun 2021
    क्या है वट सावित्रि व्रत का महत्व?

    यह पर्व हर परिस्थिति में अपने जीवनसाथी का साथ देने का संदेश देता है। इससे ज्ञात होता है कि पतिव्रता स्त्री में इतनी ताकत होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है। वहीं सास-ससुर की सेवा और पत्नी धर्म की सीख भी इस पर्व से मिलती है। मान्यता है कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और उन्नति और संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत रखती हैं।

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