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Vat Purnima Vrat 2020: वट पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि, मुहू्र्त और कथा यहां देखें

Vat Purnima Vrat 2020 Date: विवाहित महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थीं। उत्तर भारत में इस व्रत को वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता है।

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Vat Savitri Vrat 2020 Date: बीते समय में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा गया था। कुछ जगह ये व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshth Purnima) के दिन रखा जाता है। जो इस बार 5 जून को है। विवाहित महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थीं। उत्तर भारत में इस व्रत को वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता है।

वट पूर्णिमा व्रत विधि: ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। स्नान के बाद व्रत करने का संकल्प लें। महिलाएं व्रत शुरू करने से पहले पूरा श्रृगांर कर लें। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए बरगद का पेड़, सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। पेड़ में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगें। अत: वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में काला चना लेकर इस व्रत की कथा सुनें। अंत में वट वृक्ष और यमराज से घर में सुख, शांति और पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें। पंडित को दान दक्षिणा दें। दिन भर उपवास रखें। शाम में समय फलाहार करें। इस व्रत को अगले दिन खोला जाता है। ध्यान रखें कि व्रती को चतुर्दशी के दिन से ही तामसी भोजन का त्याग कर देना चाहिए।

वट पूर्णिमा व्रत का महत्व: वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार सावित्री के पति अल्पायु थे। जिस बात की जानकारी सावित्री को भी थी। एक दिन अचानक सत्यवान के सिर में अत्यधिक पीड़ा होने लगी। सावित्री अपना भविष्य समझ गई तथा अपनी गोद का सिरहाना बनाकर अपने पति को लिटा लिया। उसी समय सावित्री ने देखा अनेक यमदूतों के साथ यमराज आ पहुंचे है। धर्मराज सत्यवान के जीवन को जब लेकर चल दिए तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं।

यमराज ने कहा कि पति के प्राणों के अलावा जो भी मांगना है मांग लो और लौट जाओ। सावित्री ने अपने को सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा। यमराज ने तथास्तु कहा और आगे चल दिए। सावित्री फिर भी उनके पीछे-पीछे चलती रहीं। उसके इस कृत से यमराज नाराज हो जाते हैं। यमराज को क्रोधित होते देख सावित्री उन्हें नमन करते हुए उन्हें कहती है, “आपने मुझे सौ पुत्रों की मां बनने का आशीर्वाद तो दे दिया लेकिन बिना पति के मैं मां किस प्रकार से बन सकती हूं, इसलिये आप अपने तीसरे वरदान को पूरा करने के लिए अपना कहा पूरा करें।”

सावित्री की पतिव्रत धर्म की बात जानकर यमराज ने सत्यवान के प्राण को अपने पाश से मुक्त कर दिया। सावित्री सत्यवान के प्राण लेकर वट वृक्ष के नीचे पहुंची और सत्यवान जीवित होकर उठ बैठे। मान्‍यता है कि वट सावित्री व्रत करने और इसकी कथा सुनने से वैवाहिक जीवन या जीवन साथी की आयु पर किसी प्रकार की बाधा नहीं आती।

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