Vastu Shastra: हमारे सनातन धर्म में रोज शाम को दीया जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि सूर्यास्त के समय घर में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है। खासतौर पर तुलसी के पास या घर की चौखट पर दीया जलाना बहुत शुभ माना जाता है। कई लोग इसे मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक भी मानते हैं। लेकिन अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे शुभ फल मिलने की जगह विपरीत असर भी हो सकता है। इसलिए दीया जलाने की सही विधि और नियम जानना बेहद जरूरी है।
शाम को दीया जलाने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। यह समय पूजा-पाठ और ईश्वर स्मरण के लिए शुभ माना गया है। इस समय घर में दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि नियमित रूप से शाम को दीया जलाने से घर में समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। तुलसी के पास दीया जलाने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
सबसे पहले रखें साफ-सफाई का ध्यान
दीया जलाने से पहले जिस स्थान पर दीपक रखना है, वहां की सफाई करना बेहद जरूरी है। गंदी जगह पर दीपक जलाना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगर बिना सफाई के दीया जलाया जाए तो घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर सकती है। इसलिए हर दिन शाम को दीपक जलाने से पहले उस स्थान को साफ कपड़े से पोंछ लें। अगर मंदिर में दीया जला रहे हैं तो वहां भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
सही समय का रखें ध्यान
दीया जलाने का सही समय सूर्यास्त के तुरंत बाद माना जाता है। प्रदोष काल में दीपक जलाने से विशेष लाभ मिलता है। हालांकि देर रात दीपक जलाना उचित नहीं माना गया है, सिवाय कुछ विशेष व्रत या त्योहारों के। इसलिए कोशिश करें कि सूर्यास्त होते ही या उसके थोड़ी देर बाद ही दीया जला लें। नियमित समय पर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
घी का दीया या तेल का?
अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि दीया घी से जलाएं या तेल से। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के मंदिर में घी का दीया जलाना शुभ होता है। घी का दीपक देवताओं को प्रिय माना जाता है और इससे घर में शांति का माहौल बनता है। वहीं घर की चौखट, मुख्य दरवाजे या तुलसी के पास सरसों या तिल के तेल का दीया जलाना बेहतर माना गया है।
दीए की दिशा भी है महत्वपूर्ण
वास्तु शास्त्र के अनुसार दीपक को ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। हालांकि हर पूजा और स्थान के अनुसार दिशा अलग भी हो सकती है। इसलिए अगर मंदिर में दीपक जला रहे हैं तो कोशिश करें कि उसकी लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
